पैरा ओलंपियन प्रवीण कुमार को मिला पद्मश्री, जश्न में डूबा नोएडा; मां ने शुरू की 84 कोसी गोवर्धन परिक्रमा

गौतम बुद्ध नगर के पैरा एथलीट प्रवीण कुमार को प्रतिष्ठित पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है. जेवर के गोबिंदगढ़ गांव के निवासी प्रवीण जिले के पहले खिलाड़ी हैं जिन्हें यह सम्मान मिला. उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक में रजत और पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीता है. उनकी यह उपलब्धि जिले और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जिसने संघर्षों से सफलता की कहानी लिखी.

राष्ट्रपति भवन में पैरा ओलंपियन प्रवीण कुमार Image Credit:

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के लिए यह बड़े गर्व का पल है. यहां जेवर क्षेत्र के गांव गोबिंदगढ़ में रहने वाले पैरा एथलीट प्रवीण कुमार को पद्मश्री पुरस्कार मिला है. प्रवीण ने राष्ट्रपति भवन में यह पुरस्कार हासिल किया. जिले के वह पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें इतने बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है. उनकी इस उपलब्धि पर जिले में खुशी का माहौल है. उनके गांव में लोगों ने मिठाई बांटकर इस उपलब्धि पर जश्न मनाया.

जानकारी के मुताबिक सोमवार को आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति भवन में प्रवीण कुमार को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया. यह खबर जैसे ही उनके गांव में पहुंची, जश्न शुरू हो गया. परिवार के लोगों का कहना है कि छोटे गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन प्रवीण ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर यह मुकाम हासिल किया.

संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

प्रवीण के पिता अमरपाल सिंह ने कहा कि उनके बेटे ने आज पूरे नोएडा और जिले के युवाओं का नाम रोशन किया है. जिले के युवाओं के लिए उनका बेटा प्रेरणा श्रोत बन गया है. उन्होंने बताया कि बचपन से ही प्रवीण खेलों के प्रति समर्पित थे. कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उसने खुद को मजबूत बनाए रखा. आज उसके समपर्ण का परिणाम देश देख रहा है. प्रवीण कुमार का खेल सफर संघर्षों से भरा रहा.

सीमित संसाधनों से हासिल किया बड़ा मुकाम

सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया. टोक्यो पैरा ओलंपिक 2020 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया था. वहीं पेरिस पैरालंपिक 2024 में गोल्ड मेडल जीता. इसके अलावा विश्व स्तर पर एथलेटिक्स चैंपियनशिप प्रवीण कुमार जीत चुके हैं. प्रवीण कुमार की इस उपलब्धि पर उनकी मां निर्दोष देवी गोवर्धन महाराज की 84 कोसी परिक्रमा पर निकल चुकी हैं.

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