बस्ती के युवाओं का भगीरथ प्रयास, मनोरमा नदी को दिया जीवनदान; PM मोदी ने ‘मन की बात’ में सराहा

बस्ती के युवाओं ने प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद पौराणिक मनोरमा नदी को नया जिवनदान दिया है. बिना सरकारी मदद के, युवाओं ने 60 दिनों में 700 किलो से अधिक कचरा निकालकर नदी को स्वच्छ बनाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में इस भगीरथ प्रयास की सराहना की है.

बस्ती के युवाओं ने मनोरमा नदी को दिया जीवनदान, PM मोदी ने की सराहा Image Credit:

जब कोई नदी प्रशासनिक उपेक्षा और जन-लापरवाही के कारण दम तोड़ने लगती है, तो अमूमन समाज व्यवस्था को कोसने और शिकायतें करने में वक्त ज़ाया करता है. बस्ती जिले के युवाओं ने इसके उलट एक नई राह चुनी, शिकायत की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाई. युवाओं का भगीरथ प्रयास आज बस्ती की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को नया जीवन दे रही है.

बस्ती की पौराणिक मनोरमा नदी जब गंदगी, प्लास्टिक और जलकुंभी के दलदल में फंसकर अपनी आखिरी सांसें गिन रही थी, तब कुछ युवाओं ने इसे बचाने का बीड़ा उठाया. युवाओं ने अपने हौसले से मनोरमा नदी को पुनर्जीवित कर एक नया इतिहास रच दिया है. इस भगीरथ प्रयास की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंच प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम तक जा पहुंची है.

​इस पूरे अभियान की नींव रखने वाले स्थानीय समाजसेवी आकाश गुप्ता बताते हैं कि मनोरमा नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि बस्ती और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत है. समय के साथ यह नदी एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी थी. आकाश ने बचपन की यादों से जुड़ी इस नदी को तड़पते देखा, तो दो महीने पहले उन्होंने अकेले ही कचरा साफ करना शुरू किया.

​शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण और हतोत्साहित करने वाली थी. जब आकाश अकेले कचरा निकालते थे, तो राह चलते कुछ लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया. लेकिन आकाश का संकल्प डिगा नहीं. धीरे-धीरे उनकी इस निष्काम सेवा को देखकर स्थानीय युवाओं का ज़मीर जागा और देखते ही देखते 6 से 7 उत्साही युवाओं की एक कोर टीम तैयार हो गई.

60 दिन की अटूट तपस्या, 700 KG कचड़ा निकला

​युवाओं की इस टोली ने पिछले 60 दिनों से एक कड़ा नियम बनाया. हर दिन सुबह और शाम के वक्त ४ से ५ घंटे नदी के भीतर गंदे पानी और कीचड़ में आकंठ डूबकर सफाई करना. टीम ने अपने हाथों से नदी के सीने को चीरकर प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, भारी जलकुंभी और गाद निकालना शुरू किया. यह दो महीनों की इस अटूट तपस्या का परिणाम है.

युवाओं ने नदी से करीब 700 किलोग्राम से अधिक कचरा बाहर फेंका. ​आज जिस घाट पर लोग बदबू के कारण खड़े नहीं होते थे, वहां पानी इतना स्वच्छ हो चुका है कि लोग आस्था की डुबकी लगा रहे हैं और बेज़ुबान जानवर अपनी प्यास बुझा रहे हैं. इसी गांव के बीजेपी विधायक अजय सिंह भी अब इन युवाओं की मुहिम के साथ हो गए, और उन्होंने नदी की सफाई भी की.

PM मोदी ने इन युवाओं के जज्बे को किया सलाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 134वां एपिसोड में बस्ती के इन युवाओं के जज्बे को सलाम किया है. उन्होंने बस्ती के आकाश गुप्ता और युवाओं के टोली के प्रयासों को एक प्रेरक गाथा बताया. पीएम मोदी ने कहा कि आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे. शिंकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया.’

आकाश ने कहा कि ​नदी को मरते देखना अपनी संस्कृति को मरते देखने जैसा था. ‘मन की बात’ में सराहना मिलना हमारी पूरी टीम की तपस्या का फल है. आकाश ने कहा कि टीम का जोश ऐसा था कि किसी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हमारी मुहिम ने साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो, तो युवा समाज की किसी भी बड़ी समस्या का समाधान खुद कर सकते हैं.

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