नोएडा हिंसा: HC के फैसले के बाद आकृति चौधरी केस में किसे भरना होगा जुर्माना?

नोएडा हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद 5 लाख रुपये के मुआवजे को लेकर चर्चा तेज है. कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की तत्कालीन डीएम मेधा रूपम और NSA की पैरवी करने वाले पुलिस अधिकारी की सैलरी से यह रकम देने का निर्देश दिया है. करीब पांच महीने हिरासत में रहीं आकृति के खिलाफ पुलिस ने हिंसा भड़काने के आरोप लगाए थे.

आकृति चौधरी Image Credit: फाइल फोटो

नोएडा में अप्रैल के श्रमिक आंदोलन से जुड़े आकृति चौधरी केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा 5 लाख रुपये के मुआवजे की है. हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी पर लगा NSA डिटेंशन रद्द कर दिया और उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन सवाल है कि ये 5 लाख रुपये कौन देगा? सरकार… प्रशासन… या फिर किसी अधिकारी की जेब से?

5 महीने की हिरासत, फिर कोर्ट का फैसला

इसी साल अप्रैल में नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन हुआ था. प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगजनी के आरोप लगे. इसी मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया. उनके खिलाफ 11 एफआईआर दर्ज की गई. बाद में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया गया. करीब पांच महीने तक हिरासत में रहने के बाद आकृति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने राज्य की ओर से पेश की गई कहानी और आकृति के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने यह भी पूछा था कि आखिर ऐसा कौन सा वीडियो साक्ष्य है, जिससे साबित होता है कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया था. ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका. आखिरकार कोर्ट ने NSA के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया. साथ ही आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.

अब सवाल, पैसे कौन देगा?

यहीं से इस मामले में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि 5 लाख रुपये का भुगतान आखिर कौन करेगा? सामान्य तौर पर अगर किसी सरकारी कार्रवाई के कारण मुआवजा देना हो तो भुगतान सरकार या संबंधित सरकारी संस्था की ओर से किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में रिपोर्ट्स के मुताबिक हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम और NSA की पैरवी करने वाले पुलिस अधिकारी को अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है.

अफसरों की जेब से पैसा क्यों?

कोर्ट के इस आदेश का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि मुआवजे की जिम्मेदारी सीधे प्रशासनिक अधिकारी के वेतन से जोड़ने की बात सामने आई है. इसका संदेश साफ है कि अगर किसी नागरिक की स्वतंत्रता पर कार्रवाई कानून और प्रक्रिया के मुताबिक नहीं हुई, तो उसकी जिम्मेदारी सिर्फ सिस्टम की नहीं मानी जाएगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है. इसी वजह से अफसरों को अपनी जेब से पैसा भरना होगा.

पहले भी कोर्ट ने चेताया था

इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से आकृति के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में वीडियो साक्ष्य पेश करने को कहा था. कोर्ट का सवाल था कि वीडियो में आकृति कहां प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या आगजनी के लिए उकसाती दिखाई दे रही हैं. उस वक्त कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि अगर कार्रवाई मनमाने तरीके से की गई पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर लागत यानी जुर्माना लगाया जा सकता है.

लेकिन क्या आकृति तुरंत जेल से बाहर?

NSA के तहत हिरासत खत्म होने का मतलब यह नहीं कि आकृति के खिलाफ दर्ज बाकी सभी मामले भी खत्म हो गए. आकृति के वकील के मुताबिक, उन्हें अन्य मामलों में जमानत नहीं मिलने की वजह से जेल में ही रहना पड़ेगा.

Follow Us