PCMA और POCSO एक्ट से ऊपर है क्या शरिया कानून? बाल विवाह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि शरिया या मुस्लिम पर्सनल लॉ बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) और POCSO एक्ट से ऊपर नहीं हो सकते. विवाह की न्यूनतम उम्र सभी नागरिकों के लिए समान है, जिसका उल्लंघन किसी व्यक्तिगत कानून से नहीं हो सकता. नाबालिग से विवाह अपराध है, और ऐसे संबंध POCSO के दायरे में आते हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट Image Credit: फाइल फोटो

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए ना केवल कठोर टिप्पड़ी की है, बल्कि बड़ा फैसला भी दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि कोई शरिया या मुस्लिम पर्सनल लॉ, बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) और POCSO एक्ट से ऊपर नहीं हो सकता. कोर्ट ने कहा कि देश में विवाह की न्यूनतम उम्र सभी नागरिकों के लिए समान है. इसका किसी भी व्यक्तिगत कानून के आधार पर उल्लंघन नहीं किया जा सकता.

मामले की सुनवाई जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ में हुई. इस खंडपीठ ने 19 लोगों की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की और याचिका को खारिज कर दिया. इसमें याचिकाकर्ताओं ने बुलंदशहर में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. इस एफआईआर में पुलिस और चाइल्ड लाइन की रेस्क्यू टीम के साथ मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप हैं.

अपराध माना जाएगा नाबालिग से विवाह

मामले में कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का विवाह कराना बाल विवाह अधिनियम (PCMA) का उल्लंघन है. यह अपराध है. इसी प्रकार ऐसे विवाह के बाद बनने वाले शारीरिक संबंध को भी (POCSO Act) के दायरे में रखते हुए अपराध माना जाएगा. इसलिए किसी भी पर्सनल लॉ या शरिया कानून के आधार पर बाल विवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता. यह मानवता के भी खिलाफ है.

किसी समुदाय को छूट नहीं

हाईकोर्ट ने भी कहा कि PCMA और POCSO जैसे कानून जनहित, वैज्ञानिक समझ और राष्ट्रीय नीति पर आधारित हैं, जिनसे कोई भी व्यक्ति या समुदाय छूट नहीं ले सकता. खंडपीठ ने पुलिस और चाइल्ड लाइन की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संभावित अपराध को रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई. वहीं, एफआईआर में प्रथम दृष्टया सरकारी कार्य में बाधा और अन्य गंभीर अपराधों के पर्याप्त आधार पाए गए हैं, इसलिए एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी गई.

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