‘फिर गलती नहीं करेंगे’… गंगा नदी में इफ्तार पार्टी करने वाले 8 आरोपियों को जमानत, 6 अभी भी जेल में
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी की गंगा नदी में आयोजित इफ्तार पार्टी मामले में जेल में बंद आठ आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है. अदालत ने यह राहत आरोपियों द्वारा दाखिल एफिडेविट में माफी मांगने और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न करने का भरोसा देने के आधार पर दी. यह मामला तब चर्चा में आया था जब गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी के वीडियो वायरल हुए थे. आरोप था कि पार्टी के दौरान बिरयानी की हड्डियां गंगा में फेंकी गईं.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी की गंगा नदी में इफ्तार पार्टी आयोजित करने के मामले में जेल में बंद आठ आरोपियों को जमानत दे दी है. हाईकोर्ट ने यह राहत आरोपियों द्वारा दाखिल एफिडेविट में माफी मांगने और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने का भरोसा दिए जाने के आधार पर दी है. सभी आरोपी पिछले कई सप्ताह से जेल में बंद थे. इससे पहले वाराणसी की निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
इसके बाद आरोपियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आठ आरोपियों को राहत दी. हालांकि अभी इस मामले में छह अन्य आरोपियों को कोई राहत नहीं मिली है और उनकी याचिकाएं लंबित हैं. यह पूरा मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब सोशल मीडिया पर वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी के वीडियो वायरल हुए थे.
‘हड्डियों को गंगा नदी में फेंका गया’
वीडियो सामने आने के बाद कई संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध जताया था. पुलिस जांच में सामने आया कि गंगा नदी के बीच नावों पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे. आरोप था कि इफ्तार पार्टी के दौरान बिरयानी खाई गई और उसकी हड्डियों को गंगा नदी में फेंका गया. इसके कारण धार्मिक भावनाओं को आहत जैसी परिस्थितियां पैदा हुईं.
हाई कोर्ट की दो अलग-अलग बेंच में सुनवाई
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कुल 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. इस चर्चित में हाई कोर्ट की दो अलग-अलग बेंच ने सुनवाई की. जस्टिस राजीव लोचन की सिंगल बेंच ने पांच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने तीन अन्य आरोपियों को जमानत दी.
हाई कोर्ट ने सशर्त जमानत दी
हाई कोर्ट के सामने आरोपियों की ओर से कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके आयोजन से किसी समुदाय या व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है. आरोपियों ने हलफनामे में अदालत को आश्वासन दिया कि भविष्य में वे ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे कानून व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो. इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देने का फैसला किया.
पुलिस की जांच भी जारी
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी जांच में सहयोग करेंगे और किसी भी प्रकार से सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे. हालांकि अदालत से राहत मिलने के बावजूद यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. छह अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अभी सुनवाई बाकी है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन याचिकाओं पर भी अदालत में सुनवाई हो सकती है. फिलहाल पुलिस की जांच भी जारी है.
