असंवैधानिक नियम से प्रधान बने प्रशासक! HC ने रद्द किया आदेश हो सकती है कंटेंप्ट की कार्रवाई

हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को 13 जुलाई तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने को कहा है. इस आदेश में हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि जिस नियम से उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है, वह नियम पहले ही असंवैधानिक हो चुका है. ये नियम अस्तित्व में ही नहीं है.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव का मुद्दा लगातार गहराता जा रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस नियम को हाईकोर्ट ने पहले ही असंवैधानिक करार दिया था, उसी नियम के आधार पर प्रदेश सरकार ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बना दिया. हाईकोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश को खारिज करते हुए सरकार से जवाब तलब किया है.

हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को 13 जुलाई तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने को कहा है. इस आदेश में हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि जिस नियम से उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है, वह नियम पहले ही असंवैधानिक हो चुका है. ये नियम अस्तित्व में ही नहीं है. इसलिए इस नियम से ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका भी नहीं निभा सकते. मामले की सुनवाई सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ में हुई.

चुनाव टालने के लिए बनाया प्रशासक

बता दें कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को ही पूरा हो चुका है. वहीं क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल अगले महीने 19 जुलाई को तथा जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई को खत्म हो जाएगा. चूंकि अभी सरकार चुनाव कराने की स्थिति में नहीं है, इसलिए सरकार ने ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की पॉवर देकर चुनावों को टाल दिया है. हालांकि हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश को ही रद्द कर दिया है. इससे सरकार को बड़ा झटका लगा है.

चुनाव आयोग ने भी दिया झटका

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने भी सरकार को झटका दिया है. आयोग ने कहा कि 10 जून 2026 को पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट प्रकाशित हो चुकी है. इसलिए पंचायत चुनाव में आयोग की तरफ से कोई देरी नहीं है. बस सरकार की हरी झंडी का इंतजार है. चुनाव आयोग के इस जवाब पर सरकार ने गेंद ओबीसी आयोग के पाले में डालने की कोशिश की. लेकिन हाईकोर्ट ने भी साफ कर दिया कि अगली सुनवाई यानी 13 जुलाई तक सरकार चुनाव की कार्ययोजना पेश करे.

ये है मामला

सहारनपुर के रहने वाले अरविंद राठौर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. इसमें उन्होंने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने के लिए जारी 25 और 26 मई केआदेश को रद्द करने की मांग की थी. साथ ही उन्होंने समयबद्ध चुनाव कराने की अर्जी लगाई थी. कहा कि कार्यकाल खत्म होने के छह माह से अधिक समय तक चुनाव नहीं टाला जा सकता. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हैरानी जताई. पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव को हलफनामा पेश करने को कहा. पूछा कि किन परिस्थितियों में अस्तित्वहीन प्रावधान से प्रधानों को प्रशासक बनाया. चेतावनी दी कि तार्किक कारण ना हुआ तो प्रमुख सचिव खुद कोर्ट में हाजिर हों.

अवमानना के मूड में हाईकोर्ट

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अवमानना की कार्यवाही पर भी विचार किया जाएगा. इससे पहले कोर्ट सरकार का जवाब देखेगी. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के का हवाला देते हुए साफ तौर पर कहा कि पंचायतों का कार्यकाल किसी हाल में नहीं बढ़ाया जा सकता. इसी के साथ कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार ने जिस नियम के तहत प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया है, वह नियम प्रेम लाल पटेल के मामले में पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ असंवैधानिक घोषित कर चुकी है.

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