गजब! सपा नेता की 4 करोड़ के कोठी पर 22 करोड़ का हाउस टैक्स! 2 करोड़ का पानी का बिल भी बकाया

सहारनपुर में सपा नेता को नगर निगम से 4 करोड़ की कोठी पर 22 करोड़ से अधिक का हाउस टैक्स और 12 करोड़ का पानी का बिल मिला है. परिवार इसे नगर निगम की बड़ी चूक बता रहा है, जिससे वे सदमे में हैं. यह मामला जीआईएस सर्वे और कर निर्धारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

सपा नेता को 22 करोड़ हाउस टैक्स का चौंकाने वाला नोटिस

सहारनपुर में नगर निगम की कर निर्धारण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. वार्ड नंबर-2 के रामनगर स्थित मल्हीपुर रोड पर रहने वाले समाजवादी पार्टी के नेता फरहाद गाड़ा के परिवार को नगर निगम की ओर से GIS सर्वे के आधार पर ऐसा हाउस टैक्स नोटिस भेजा गया है, जिसे देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया.

परिवार का दावा है कि जिस मकान की अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ रुपये है, उस पर नगर निगम ने 22 करोड़ से अधिक का हाउस टैक्स लगा दिया. इतना ही नहीं, नोटिस में यह भी दर्शाया गया है कि 12 सदस्यों वाला परिवार एक साल में 2 करोड़ 16 लाख रुपये का सरकारी पानी इस्तेमाल कर गया. बकाया सहित 12 करोड़ रुपये का पानी का बिल भी आया है.

‘गलती नहीं सुधारा तो कानूनी कार्रवाई करेंगे’

नोटिस मिलने के बाद परिवार के लोगों के होश उड़ गए. परिवार के मुखिया फरहाद गाड़ा का कहना है कि सालों की मेहनत और जीवन भर की कमाई से बनाए गए मकान पर उसकी कीमत से कई गुना अधिक टैक्स का नोटिस भेज दिया गया. पूरे परिवार को समझ नहीं आ रहा कि आखिर इतनी बड़ी राशि किस आधार पर तय की गई.

फरहाद गाड़ा का आरोप है कि नगर निगम की गंभीर लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. उनका कहना है कि यदि जल्द इस गलती को नहीं सुधारा गया तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे. सपा नेता का कहना हैं कि उनकी कोठी करीब 816 गज में बनी है. उसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग चार करोड़ रुपये है.

अधिकारियों ने इसे बताया टाइपिंग मिस्टेक

सपा नेता ने बताया कि कोठी का निर्माण दो साल पहले ही हुआ था. केवल एक साल से ही उनका परिवार यहां रह रहा है. वहीं, इस पूरे मामले पर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह टाइपिंग या डेटा एंट्री की त्रुटि प्रतीत होती है. अधिकारियों का दावा है कि मामले की जांच कर रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन किया जाएगा.

हालांकि, परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी गलती को केवल “टाइपिंग मिस्टेक” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस घटना ने नगर निगम के GIS सर्वे, कर निर्धारण प्रक्रिया और रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखने वाली बात होगी कि नगर निगम इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है?

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