मानसून सत्र में पेश होगी संभल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट, डेमोग्राफी बदलने समेत कई बड़े दावे

उत्तर प्रदेश विधानसभा में संभल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट पेश होगी. रिपोर्ट में दशकों से संभल की डेमोग्राफी बदलने की गंभीर कोशिशों का खुलासा है. हिंदू आबादी घटकर 15% हुई, जिसका कारण हिंसा, पलायन, 'लव जिहाद' बताया गया है. रिपोर्ट में सपा सांसद के भाषण का भी जिक्र है.

विधानसभा में संभल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट पेश होगी

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाएगी. करीब 450 पन्नों की इस रिपोर्ट को आयोग ने पिछले साल 28 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा था. इसमें संभल की सामाजिक और डेमोग्राफी स्थिति को लेकर कई गंभीर दावे किए गए हैं.

आयोग के अनुसार, पिछले कई दशकों में सुनियोजित तरीके से संभल की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी लगभग 45 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में घटकर करीब 15 प्रतिशत रह गई है. इसके पीछे लगातार हुई हिंसा, पलायन और सांप्रदायिक घटनाओं को प्रमुख कारण बताया है.

15 बड़े दंगों में 213 लोग मारे गए, जिसमें 209 हिंदू

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दंगों, कथित लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों के माध्यम से हिंदू आबादी में कमी आई. यह भी उल्लेख है कि हिंदू 20% से नीचे आने के बाद क्षेत्र में विदेशी मूल के मुसलमानों और स्थानीय (देसी) मुसलमानों के बीच भी संघर्ष की स्थिति पैदा हुई. तुर्क और धर्मांतरित हिंदू मूल के पठानों के बीच विवाद का जिक्र किया है.

जांच रिपोर्ट में पिछले सात दशकों के दौरान संभल में हुए 15 बड़े सांप्रदायिक दंगों का उल्लेख किया गया है. इन दंगों में 213 लोग मारे गए, जिसमें 209 हिंदू थे. इसके अलावा 68 तीर्थ स्थलों और 19 पावन कूपों पर कथित कब्जे का भी जिक्र है. रिपोर्ट में हरिहर मंदिर का उल्लेख करते हुए वहां बाबर काल से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा भी किया गया है.

सांसद जियाउर्रहमान बर्क के भाषण का भी जिक्र

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कुछ आतंकी संगठनों की कथित सक्रियता और आसिम उर्फ सना-उल-हक की भूमिका का भी उल्लेख किया है. रिपोर्ट के अनुसार, उसे अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा चुका है. इसके साथ ही संभल में अवैध हथियारों और मादक पदार्थों के कारोबार के तेजी से फैलने संबंधी टिप्पणियां भी रिपोर्ट में शामिल है.

यही नहीं, रिपोर्ट में संभल से सपा के मौजूदा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के हिंसा से दो दिन पहले दिए भाषण का भी जिक्र है. सपा सांसद ने कहा था, ‘हम इस देश के मालिक हैं, नौकर या गुलाम नहीं.’ आयोग की रिपोर्ट में आरोप है कि 22 नवंबर 2024 को सांसद बर्क के इन्हीं बयानों के बाद संभल में माहौल खराब हुआ और हिंसा की घटना हुई.

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