राम मंदिर के नाम पर चंदा लेने के आरोपों को शंकराचार्य ने किया खारिज, बोले- सबूत है तो सामने लाओ
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर चढ़ावा मामले की SIT जांच में देरी पर सवाल उठाए हैं. साथ ही उन पर लगाए जा रहे चंदा लेने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. शंकराचार्य ने चुनौती दी कि सबूत है तो सामने लाओ, हम जांच के लिए तैयार हैं. साथ ही, अपनी गौ माता समष्टि यात्रा पर बात की है.
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों अपने गौ माता समष्टि यात्रा पर है. इस दौरान वह गुरुवार को मुरादाबाद पहुंचें. जहां राम मंदिर चढ़ावा मामले में चल रही SIT जांच पर सवाल उठाएं. वहीं, उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए चंदा लेने के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया. साथ ही दावा किया अगर सबूत हैं तो हम जांच को तैयार.
शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में राम मंदिर चढ़ावा मामले पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि SIT जांच में लगातार देरी हो रही है. पहले 3 दिन, फिर 7 दिन, फिर 15 दिन का समय दिया गया, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई. उन्होंने कहा कि जांच में बेवजह टालमटोल नहीं होनी चाहिए और जल्द सच जनता के सामने आना चाहिए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर क्या हैं आरोप?
वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगाए गए चंदा लेने के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई यह कहता है कि उन्होंने गांव-गांव जाकर चंदा लिया है तो गांव का नाम बताए और कैमरा लेकर उनके साथ चलें… साथ ही शंकराचार्य चुनौती दी कि अगर सबूत है तो उसे सामने लाए. हम हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं.
दरअसल, दिवंगत जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर चोरी और गबन के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि शंकराचार्य ने ‘राम राम ग्राम ग्राम अभियान’ के तहत राम जन्मभूमि के लिए एकत्रित सोने, चांदी और नकद दान की बड़ी राशि का दुरुपयोग किया है.
दो साल पहले भी की थी मामले में शिकायत
स्वामी गोविंदानंद सरस्वती का आरोप है कि राम मंदिर दान मामले में पहले चोर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हैं. गोविंदानंद का दावा है कि उन्होंने इस मामले में 2024 में ही मुख्यमंत्री, राम मंदिर ट्रस्ट और अयोध्या के SHO को पत्र लिखकर ये जानकारी दी थी. हालांकि, अपनी यात्रा के दौरान मुरादाबाद पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे खारिज कर दिया.