कौन हैं पूजा पाल? बसपा-सपा से रहीं विधायक, अब BJP में मिली अहम जिम्मेदारी

पूर्व बसपा और सपा विधायक पूजा पाल को यूपी बीजेपी में बड़ी जिम्मेदारी मिली है. बीजेपी ने उन्हें नई प्रदेश कार्यकारिणी उपाध्यक्ष बनाया है. पूजा पाल की राजनीतिक यात्रा में यह बड़ा मोड़ है, जो 2005 में पति राजू पाल की हत्या के बाद शुरू हुई. वह दो बार लगातार बसपा से विधायक रही हैं. जबकि पिछले चुनाव में वह समाजवादी पार्टी से विधायक चुनी गई थीं.

यूपी भाजपा में पूजा पाल को अहम जिम्मेदारी Image Credit:

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश में अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी सूची में कुल 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री, कई प्रदेश मंत्री, क्षेत्रीय अध्यक्ष और मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है. वहीं, इसमें पूर्व बसपा और सपा विधायक पूजा पाल का नाम भी शामिल है, जिन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली है.

कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल को बीजेपी ने नई कार्यकारिणी में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है. उनकी नियुक्ति को संगठन में ओबीसी-दलित समीकरण साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. पूजा पाल इलाहाबाद पश्चिम के पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी हैं, जिसके कथित हत्या का आरोप माफिया अतीक अहमद पर लगाया गया था.

बसपा से पहली बार विधायक बनी थीं पूजा पाल

बीजेपी में बड़ा पद मिलना पूजा पाल की राजनीतिक यात्रा में बड़ा मोड़ है, जो 2005 में पति राजू पाल की हत्या के बाद शुरू हुई. पूजा पाल के पति राजू पाल की साल 2005 में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी. राजू पाल की हत्या उनकी शादी के सिर्फ 10 दिन बाद ही कर दी गई थी. इस हत्याकांड में माफिया अतीक अहमद और उसके गुर्गों का नाम सामने आया था.

पति की मौत के बाद पूजा पाल का राजनीतिक सफर की शुरूआत हुई. उसी साल इलाहाबाद शहर की पश्चिमी सीट पर उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी से वह मैदान में उतरी, लेकिन अतीक के भाई अशरफ हार का सामना पड़ा. इसके बाद 2007 में वह बसपा से पहली बार विधायक बनीं, और 2012 में भी चुनी गई, लेकिन 2017 में फिर हार देखना पड़ा.

CM योगी की प्रशंसा के बाद सपा से निष्कासित

साल 2017 के चुनाव में मिली हार के अगले साल बहुजन समाज पार्टी ने पूजा पाल को पार्टी से साइडलाइन कर दिया. बाद में उन्होंने साल 2019 में समाजवादी पार्टी का दामन थामा लिया. इसके बाद के 2022 विधानसभा चुनाव में सपा ने पूजा पाल को कौशांबी की चायल सीट से टिकट दिया, जहां से वह बंपर वोटों से जीत हासिल की और तीसरी बार फिर से विधायक बनीं.

वहीं, अगस्त 2025 में पूजा पाल ने विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और अतीक अहमद के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की खुलकर सराहना की थी. साथ ही इसके बाद खुद मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की थी. इस घटना के अगले दिन ही सपा ने पूजा पाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया था.

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