योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब 12.5 एकड़ में भी बन सकेगी टाउनशिप, अटके पड़े हजारों हाउसिंग प्रोजेक्ट किए जा सकेंगे पूरे
यूपी में पहले टाउनशिप प्रोजेक्ट को न्यूनतम 25 एकड़ जमीन पर 8 से 12 साल के भीतर पूरा करना अनिर्वाय था. लेकिन अब यूपी कैबिनेट ने इसमें कुछ बदलाव किया है. अब 12.5 एकड़ पर भी टाउनशिप विकसित की जा सकेगी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार यानी 02 दिसंबर को उन हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है जिनका पैसा और सपना सालों से अटकी पड़ी टाउनशिप परियोजनाओं में फंसा हुआ था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2005 और 2014 में ऐतिहासिक संशोधन को मंजूरी दे दी गई.नअब बिल्डरों को सिर्फ 12.5 एकड़ जमीन पर ही टाउनशिप बनाने की इजाजत मिल जाएगी. साथ ही प्रोजेक्ट पूरा करने की समय-सीमा भी घटाकर 3 से 5 साल कर दी गई है।
पहले क्या था, अब क्या बदला?पहले नियम
पहले इस प्रोजेक्ट को न्यूनतम 25 एकड़ जमीन पर 8 से 12 साल के भीतर पूरा करना अनिर्वाय था. नए नियम के अनुसार न्यूनतम जमीन की जरूरत घटकर 12.5 एकड़, प्रोजेक्ट पूरा करने की समय सीमा सिर्फ 3-5 साल कर दी गई है. कैबिनेट बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि 25 एकड़ तक की टाउनशिप अब 3 साल में पूरी करनी होगी. वहीं, 25 एकड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट को 5 साल में पूरा करनी होगा. इसके अलावा पुरानी स्वीकृत लेकिन बंद पड़ी परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने की छूट दे दी गई है.
थर्ड पार्टी को नहीं बेची जा सकेगी बची हुई जमीन
DPR (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में संशोधन और समय-सीमा बढ़ाने की सुविधा भी दी गई है. इसके अलावा प्रोजेक्ट के बाहर 10% अतिरिक्त क्षेत्र में भी विकास की अनुमति दी गई है. हालांकि, अगर अगर बिल्डर 25 एकड़ से कम जमीन (12.5 एकड़) पर प्रोजेक्ट करेगा तो बची हुई जमीन किसी थर्ड पार्टी को नहीं बेची जा सकेगी. वह सिर्फ उसी प्रोजेक्ट के लिए रहेगी.
बंद पड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट को खोलने का मिला रास्ता
2005 और 2014 की पुरानी नीति के तहत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर समेत पूरे प्रदेश में दर्जनों टाउनशिप प्रोजेक्ट शुरू हुए थे. लेकिन सख्त नियमों और आर्थिक दिक्कतों की वजह से ज्यादातर प्रोजेक्ट 10-15 साल से अधर में लटके हुए हैं. इनमें हजारों लोगों ने अपना जीवन-भर की कमाई लगा रखी है. कई केस तो कोर्ट में भी चल रहे थे.अब सरकार ने बिल्डरों को राहत देकर असल में आम खरीदारों को बचाने का काम किया है.
