यूपी में सरकारी कर्मचारियों को हर साल देनी होगी चल-अचल संपत्ति की जानकारी, शेयर मार्केट में निवेश का भी देना होगा ब्यौरा
यूपी में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए चल-अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा अनिवार्य करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. साथ ही अगर वह अपने 6 माह के मूल वेतन से अधिक का निवेश शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर, बॉन्ड या स्टॉक में करते हैं है तो इसकी जानकारी भी देनी होगी.
यूपी में अब राज्य का कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने 6 माह के मूल वेतन से अधिक का निवेश शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर, बॉन्ड या स्टॉक में करता है तो उसे इसकी जानकारी देनी होगी. यह फैसला सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया. कैबिनेट ने इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956’ में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दे दी है.
अब हर साल देना होगा संपत्ति का ब्यौरा
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए चल-अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा अनिवार्य करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई. पहले सरकारी कर्मचारियों को हर 5 साल में अपनी संपत्ति की घोषणा करनी होती थी. लेकिन इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही अब सभी सरकारी कर्मचारियों को सालाना अपनी सपंत्ति का विवरण जमा करना होगा.
संपत्ति की जानकारी नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
अगर सरकारी कर्मचारी सेवा नियमावली के नियम-24 में किए गए इन बदलावों के तहत अपनी अपनी संपत्ति का ब्योरा हर साल नहीं देते हैं तो उनकी पदोन्नति रोकी जा सकती है. इसके अलावा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.
शेयर मार्केट में निवेश की भी देनी होगी जानकारी
साथ ही अगर कोई सरकारी कर्मचारी 6 महीने के मूल वेतन से अधिक का निवेश शेयर मार्केट में करता है, तो उसकी जांच की जाएगी. अगर उक्त कर्मचारी इसको लेकर दोषी पाया जाता है तो उसपर कार्रवाई की जाएगी. सरकार का यह कदम भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लिया गया है.
भ्रष्टाचार पर रोक लगाना उद्देश्य
बैठक में बैठक में कार्मिक विभाग के जिस प्रस्तावों को यूपी कैबिनेट की तरफ से स्वीकृति मिली है, उसका उद्देश्य सरकारी तंत्र से भ्रष्टाचार और अघोषित आय पर लगाम लगाना है. अब ‘डिजिटल लेजर’ और अनिवार्य सूचना प्रणाली के माध्यम से विभाग कर्मचारियों की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रख सकेगा, ताकि कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार ना कर पाए. इसके अलावा भ्रष्टाचार से बनाए गए बेनामी संपत्ति या भारी निवेश को छिपा ना पाए
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