UP में नई न्यूनतम मजदूरी दरें लागू, राज्यपाल ने दी मंजूरी; ये तीन कैटेगरी तय
उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर है. राज्यपाल से मंजूरी के बाद प्रदेश में नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से लागू हो गई हैं. योगी सरकार के इस निर्णय से श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी और औद्योगिक शांति स्थापित होगी. पूरे प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है.
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया घटनाक्रम के बाद योगी सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का निर्णय लिया. प्रदेश की राज्यपाल ने अब इसपर अपनी मुहर लगाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. यूपी में नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं. योगी सरकार के इस निर्णय से श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी.
नोएडा की घटना के बाद, राज्य सरकार ने मजदूरों और नियोक्ताओं के बीच सैलरी बढ़ाने के झगड़े को सुलझाने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी सिफारिश में तीन श्रेणियां में वेतन की दरें निर्धारित की हैं. इसके आधार पर, राज्य को तीन कैटेगरी में बांटा गया है, जिनमें रहने-सहने के खर्च के आधार पर अलग-अलग रेट तय किए गए हैं.
गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 21% की वृद्धि
समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया. प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को रखा गया, जहां जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है. यहां 74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों के वेतन में 21% की वृद्धि की गई है. अब अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय की गई है.
द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिले शामिल हैं, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किए गए हैं. तृतीय श्रेणी में शेष जिले हैं, जहां क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये तय की गई हैं. यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी, जिसका भुगतान मई महीने में 7 से 10 तारीख के बीच किया जाएगा. यह संविदा और स्थायी दोनों कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होंगी.
मूल वेतन में वीडीए शामिल, बोनस-ग्रेच्युटी देनी होगी
इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) शामिल है. ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना होगा. इसके साथ ही बोनस और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं भी देनी होगी. यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई दरें लागू होने के बाद अगर कोई ठेकेदार समय पर वेतन नहीं देता या कम भुगतान करता है तो उसके खिलाफ न केवल आर्थिक कार्रवाई होगी बल्कि लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.
दरअसल, साल 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिसके चलते यह अंतर बढ़ता गया. अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बाद उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. इससे उद्योगों और मजदूरों के बीच शांति स्थापित होगी.