अगर पुराने-जर्जर हो चुके हैं अपार्टमेंट तो टेंशन नहीं; योगी सरकार की इस योजना से हो जाएंगे नए जैसे

योगी सरकार ने 'उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026' लागू की है. इसका उद्देश्य 25 साल से पुराने जर्जर भवनों को सुरक्षित और आधुनिक बनाना है. यूपी सरकार ने तेजी से हो रहे शहरीकरण और पुराने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की खराब हालत को देखते हुए यह बड़ा कदम उठाया है.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

उत्तर प्रदेश में 25 साल से पुराने जर्जर भवनों और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को आधुनिक बनाया जाएगा. योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू की है. अगर आप पूराने अपार्टमेंट में रहते हैं, जो समय के साथ जर्जर हो गई है. ऐसे में उन भवनों को नया जीवन देने की दिशा में शहरी पुनर्विकास नीति के तहत यह बड़ा कदम उठाया गया है.

हाल में कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी किया था. गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने पिछले दिनों इसको स्वीकृति भी दे दी है. GDA के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने कहा कि यह नीति रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश के द्वार खोलने के साथ आधुनिक और व्यवस्थित आवास की मांग को भी पूरा करेगी.

1500 वर्ग मीटर क्षेत्र जरूरी, नजूल-लीज भूमि शामिल नहीं

योगी सरकार ने शहरीकरण और पुराने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की खराब हालत को देखते हुए यह पॉलिसी अपनाई है. नई पॉलिसी के तहत, हाउसिंग सोसाइटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी. हालांकि, इसमें 1,500 स्क्वायर मीटर से कम वाले मकान शामिल नहीं होंगे.

इस नीति के तहत 1,500 स्क्वायर मीटर से कम जमीन पर बने मकान और सिंगल घर नहीं आएंगे. इसके अलावा नजूल की भूमि, लीज पर आवंटित भूमि और इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि भी इस नीति में शामिल नहीं होगी. पुनर्विकास के लिए न्यूनतम 1500 वर्ग मीटर का क्षेत्र होना आवश्यक है, जिसे सरकार बेहतर मास्टर प्लानिंग के तहत फिर से विकसित करेगी.

इन तीन मॉडल के तहत भवनों को मिलेगा नया जीवन

यूपी सरकार ने पुनर्विकास नीति के तहत तीन मॉडल निर्धारित की हैं, जिसे तीन साल के अंदर पूरा करना अनिवार्य है, विकट परिस्तिथि में दो साल की अवधि बढ़ाई जा सकेगी. नीति के तहबत पहला सरकारी एजेंसी मॉडल है, जहां विकास प्राधिकरण सीधे कार्य करेंगे. दूसरा पीपीपी मॉडल होगा, जिसमें प्राइवेट डेवलपर्स की भागीदारी के साथ त्रिपक्षीय समझौता होगा.

वहीं, तीसरा स्वयं सहायता मॉडल है, जहां सोसायटियां खुद पुनर्विकास का जिम्मा लेंगी. इसके साथ ही निर्माण अवधि के दौरान प्रभावित परिवारों को ट्रांजिट आवास या किराये की व्यवस्था मिलेगी. योगी सरकार की इस पॉलिसी को यूपी के शहरों को ज़्यादा सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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