15 दिनों के अंदर पंचायत चुनाव के लिए OBC आयोग नहीं बना तो अवमानना याचिका करेंगे दाखिल, वकील मोतीलाल यादव की चेतावनी

पंचायत चुनाव को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के सामने राज्य सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि ओबीसी आयोग गठन की पूरी प्रक्रिया 15 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाएगी. अगर सरकार 15 दिनों के अंदर ओबीसी आयोग का गठन नहीं करती है तो वे शासन के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करेंगे.

पंचायत चुनाव (सांकेतिक तस्वीर) Image Credit:

आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए समर्पित आयोग के गठन की मांग तेज हो गई है. जनहित याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने प्रदेश सरकार को लिखित प्रत्यावेदन भेजकर तत्काल आयोग गठन की मांग की है. उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर हाईकोर्ट के आश्वासन के बावजूद 15 दिनों में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो वे अवमानना याचिका दायर कर देंगे.

याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 4 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि ओबीसी आयोग गठन की पूरी प्रक्रिया 15 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाएगी. इसी आधार पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने उनकी जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया था.

यूपी में मौजूदा ओबीसी कमीशन का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था. पांच माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आयोग गठन का मामला लंबित पड़ा है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह देरी जानबूझकर की जा रही है. इससे पंचायत चुनावों में ओबीसी सीटों के आरक्षण का निर्धारण प्रभावित हो रहा है. इससे पंचायच चुनाव में भी देरी हो सकती है.

क्यों जरूरी है आयोग का गठन?

पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों ट्रिपल टेस्ट के अनुरूप ही तय किया जा सकता है. इसके लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन, उसकी रिपोर्ट और रैपिड सर्वे अनिवार्य है. बिना इस प्रक्रिया के पुरानी आरक्षण सूची पर चुनाव कराना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

सरकार का आश्वासन कोर्ट रिकॉर्ड पर- मोतीलाल यादव

अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने राज्य सरकार के साथ-साथ राज्य निर्वाचन आयोग से भी अपील की है कि अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने के लिए आयोग गठन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए. उन्होंने कहा, सरकार का आश्वासन कोर्ट रिकॉर्ड पर है.

मजबूरन अवमानना याचिका करना पड़ेगा दाखिल

अधिवक्ता मोतीलाल यादव कहा अगर समयसीमा का पालन नहीं हुआ तो हम मजबूरन अवमानना याचिका दायर करेंगे. यह मांग ऐसे समय में उठी है जब पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और राजनीतिक दलों के बीच भी आरक्षण को लेकर चर्चाएं तेज हैं. आयोग गठन में और देरी होने से न केवल चुनाव की समय-सारिणी प्रभावित हो सकती है, बल्कि कानूनी उलझनें भी बढ़ सकती हैं.