BBA के लिए 800, LLB के लिए 1000 रुपये… UP में विश्वविद्यालयों की परीक्षा फीस तय
योगी सरकार ने यूपी में विश्वविद्यालयों को परीक्षा शुल्क शासनादेश के अनुसार ही लेने का सख्त निर्देश दिया है. उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठा रही है. यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में विश्वविद्यालयों द्वारा फीस लिए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक की. इसमें विश्वविद्यालयों को परीक्षा शुल्क शासनादेश के अनुसार ही लेने का सख्त निर्देश दिया है.
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्य विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में निर्धारित दरों के अनुसार ही लें. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराई जा सकती है. और इसमें दोषी पाए गए विश्वविद्यालयों पर उचित कार्रवाई की जाएगी.
फीस में बढ़ोतरी से कमजोर छात्रों को कठिनाई
मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता, पारदर्शी व छात्र हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने चाहिए.
किस कोर्स के लिए कितनी परिक्षा फ़ीस लगेगी?
यूपी में विश्वविद्यालयों को बीए, बीएससी, बीकॉम, BBA, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे कोर्स के लिए 800 रुपये. LLB, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक, बायोटेक के लिए 1000 रुपये और बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है.
विश्वविद्यालय शासनादेशों का पूर्ण रूप से पालन करें
उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे शासनादेशों का पूर्ण रूप से पालन करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें.