6 महीने पहले प्रमोशन, अब क्यों हुआ 37 अफसरों का डिमोशन? BHU के अस्पताल में छिड़ा महासंग्राम
वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में बड़ा बवाल छिड़ गया है, जहां 6 महीने पहले पदोन्नत किए गए 37 नर्सिंग अफसरों को डिमोट कर दिया गया है. नर्सिंग अफसरों का आरोप है कि यह केंद्रीय आरक्षण नीति और डीओपीटी दिशानिर्देशों का उल्लंघन है. उन्होंने उच्चस्तरीय जांच और न्याय की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया है. यह डिमोशन आरक्षण नियमों के कथित उल्लंघन की शिकायत के बाद हुआ है.
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित बीएचयू के आईएमएस बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में बड़ा बवाल हो गया है. यह छह महीने पहले ही प्रमोट किए गए 37 अफसरों को डिमोट कर दिया गया है. इसकी जानकारी मिलते ही नर्सिंग अफसरों ने मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इस संबंध में कुलपति और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को ज्ञापन देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर केंद्रीय आरक्षण नीति, 200-पॉइंट रोस्टर और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नर्सिग अफसरों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया है. बता दें कि तीन जनवरी 2026 को ही अस्पताल के 2015, 2017 और 2018 बैच के 195 नर्सिंग अफसरों की डीपीसी हुई थी. इसमें इन्हें सीनियर नर्सिंग अफसर के पद पर प्रमोट किया गया था. इसके विरोध में 2018 बैच के एक नर्सिंग अफसर ने आवाज भी उठाई थी. उसने एससी-एसटी सेल में शिकायत करते हुए आरक्षित सीटों को नियमानुार नहीं भरने का आरोप लगाया था.
इसलिए हुआ डिमोशन
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसटी सेल ने चिकित्सा अधीक्षक को डीपीसी का रीव्यू कराने को कहा था. इसमें नर्सिंग अफसरों ने बताया कि तीन जनवरी 2026 की लिस्ट में बैकलॉग को नियमानुसार प्राथमिकता मिली थी, लेकिन संशोधित सूची में इन्हें सबसे अंत में समायोजित किया गया है. रीव्यू डीपीसी में 2015 और 2018 (एससी/एसटी) बैच को प्रमोट किया गया, लेकिन 2017 के जनरल और ओबीसी वर्ग के नर्सिंग अफसरों को बाहर कर दिया. ऐसे में 37 अफसरों को डिमोट करना पड़ा है.
मेरिट पर हुआ प्रमोशन
नर्सिंग अफसरों के मुताबिक संशोधित सूची में 195 कर्मचारियों में से 146 को सामान्य श्रेणी में मेरिट के आधार पर प्रमोशन दिया गया था. इसमें आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने नियुक्ति के दौरान आयु, अंकों या अन्य प्रकार की छूट का लाभ लिया था. जबकि ऐसे अभ्यर्थियों को ऑन मेरिट समायोजित ही नहीं किया जा सकता. नर्सिंग अफसरों का कहना है कि वरिष्ठता निर्धारण के आधार भी सवालों के घेरे में है. चूंकि नियुक्तियां मेरिट सूची के आधार पर हुई थीं, इसलिए वरिष्ठता भी मेरिट के अनुसार तय होनी चाहिए.