काशी में मणिकर्णिका घाट पर प्रतिमाओं के तोड़े जाने का क्या है सच? DM ने बताया
काशी के मणिकर्णिका घाट को लेकर एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें घाट पर मौजूद मंदिर और प्रतिमाओं को तोड़े जाने का दावा किया जा रहा था. अब जिलाधिकारी ने संत्येंद्र दास ने इस मामले पर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा हैं कि ये खबरें पूरी तरह से भ्रामक है. ऐसा करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
13 जनवरी यानी मंगलवार को काशी के मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में विकास के नाम पर मंदिर और उसकी प्रतिमा तोड़े जाने का दावा किया गया. इस वीडियो के वायरल होते ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया. अच्छी-खासी संख्या में लोग विरोध-प्रदर्शन करने मणिकर्णिका घाट पहुंच गए. खबर सुनकर प्रशासन के हाथ-पांव भी फूल गए. स्थिति ना बिगड़े इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. अब इस मामले में वाराणसी के डीएम ने मीडिया के सामने आकर पूरी बात बताई है.
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने मामले पर सफाई दी
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मणिकर्णिका घाट के विकास और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है. बाढ़ की वजह से ये काम रुका हुआ था. इसे फिर से शुरू किया गया है. मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार की पौराणिक मान्यता है. हर साल लाखों की संख्या में लोग यहां दाह संस्कार और मुंडन संस्कार के लिए पहुंचते हैं. जगह कम होने की वजह से लोगों को लम्बा इंतज़ार करना पड़ता है. इससे अव्यवस्था की स्थिति भी बन जाती है. इन बातों को ध्यान में रख कर ही ये विकास कार्य कराए जा रहे हैं.
किसी तरह की कोई क्षति नही हुई है- जिलाधिकारी
उन्होंने आगे बताया कि मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियों पर कुछ कलाकृतियां बनी हुई थीं. उनको संस्कृति विभाग ने संरक्षित किया है. मसान नाथ मंदिर और तारकेश्वर महादेव मंदिर को यथावत रखते हुए उसका संरक्षण करेंगे. किसी तरह की कोई क्षति नही हुई है. न कोई मंदिर या प्रतिमा ही टूटी है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से जो लोग मंदिर और प्रतिमा तोड़े जाने संबंधी भ्रामक खबरें प्रसारित कर रहे हैं उन्हें चिन्हित किया जा रहा है. उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
बता दें कि मणिकर्निका घाट का जीर्णोद्धार के साथ-साथ उसका विकास किया जा रहा है. जुलाई 2023 में पीएम मोदी ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था. नगर निगम की देख रेख में सीएसआर के फण्ड से 20 करोड़ की लागत से ये प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा. प्रोजेक्ट में 29,300 वर्ग मीटर क्षेत्र में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा प्रदान की जाएगी.
श्रद्धालुओं को दी जाएंगी ये सुविधाएं
इस प्रोजेक्ट में सीढ़ियों को बेहतर बनाया जाएगा. शवदाह के लिए प्लेटफार्म और ऊंची-ऊंची चिमनियां बनेंगी. पीने के लिए आरओ पानी की व्यवस्था,शौचालय, लोगों के लिए वेटिंग रूम, लकड़ियों के लिए स्टोर रूम और रैम्प जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
