काशी में डूबे श्मशान घाट, छतों पर हो रहा शवदाह; क्यों कहर बरपाने पर तुली गंगा?

वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर से सभी श्मशान घाट पानी में डूब गए हैं. मणिकर्णिका व हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह अब छतों पर हो रहा है, जिससे लकड़ी की कमी व जगह की समस्या के कारण अंतिम संस्कार मुश्किल हो गया है. प्रशासन ने नावों पर रोक लगाकर NDRF तैनात की है, लोगों को सुरक्षित रहने की अपील की है.

बनारस में बाढ़ से बुरे हाल Image Credit:

पहाड़ों पर भारी बारिश की वजह से गंगा यमुना एवं उसकी सहायक नदियों में सैलाब आ गया है. इन नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर की वजह से आधे से अधिक उत्तर प्रदेश में त्राहि-त्राहि मच गई है. इसका सीधा असर भगवान विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में भी दिख रहा है. यहां खुद गंगा ही तांडव मचाने की ओर हैं. वाराणसी में आज बुधवार की दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु (71.2 मीटर) के करीब 67.4 मीटर पर पहुंच गया.

इस मोक्ष नगरी में आलम यह है कि मणिकर्णिका और हरिश्चन्द्र घाट आदि सभी श्मशान घाट डूब गए हैं. यहां शवदाह मुश्किल से हो पा रहा है. सभी घाटों के बीच आपसी सम्पर्क टूट गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक निचले प्लेटफार्म पहले ही पानी में डूब गए. अब छतों पर शवदाह हो रहा है. लेकिन जिस तरह से गंगा बढ़ रही हैं, यहां भी शवदाह में दिक्कत आ सकती है. उधर, मणिकर्णिका घाट से दूसरे घाटों की ओर जाने का रास्ता बंद हो चुका है. बाबा मसाननाथ का आधा मंदिर जलमग्न हो गया है.

लकड़ी की टाल डूबने से बढ़ी मुश्किल

गंगा का पानी ऊपर चढ़ने की वजह से लकड़ियों की टाल डूब गई है. इसकी वजह से शवों को जलाने में काफी मुश्किल हो रही है. अब शव जलने में टाइम भी काफी लग रहा है. गाज़ीपुर से शवदाह करने आए विजय उपाध्याय ने बताया कि पिछले चार घंटे से वो इंतज़ार कर रहे हैं. छतों पर सीमित जगह है, इसलिए शवों को एक लंबी कतार में रखा गया है. लकड़ी व्यवसायी अजय भारती ने बताया कि छत पर शवों के साथ ही देखने-घूमने और फोटो खींचने वाले भी पहुंच जाते हैं. इसकी वजह से छत पर जगह कम पड़ जा रही है.

गंगा में समाया सिंधिया घाट

सिंधिया घाट पर रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दत्रात्रेय चरण पादुका मंदिर अखाड़ा गंगा में समा चुका है. तीर्थ पुरोहित निर्मेश द्विवेदी ने बताया कि रोज़ाना डेढ़ सौ से दो सौ शवदाह मणिकर्णिका पर होता है. लेकिन गंगा जी का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है और शवदाह में मुश्किलें आ रही हैं. हालात को देखते हुए गंगा में नावों का संचालन रोक दिया गया है. प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. जल पुलिस और NDRF की टीमों को घाटों पर तैनात किया गया है. श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे गंगा के किनारे न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें.

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