वाराणसी में गंज शहीदा मस्जिद पर नोटिस, इंतजामिया कमेटी ने बताया फर्जी; कहा- यह रेलवे से भी पुरानी
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी ने वाराणसी की गंज-ए-शहीदा मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस को फर्जी बताया है. उनका दावा है कि लगभग 1000 साल पुरानी यह मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर नहीं है, जिसके ऐतिहासिक दस्तावेज़ मौजूद हैं. अंजुमन ने इसको लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात की है.
वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार को लेकर गंज शहीदा मस्जिद को हटाने का नोटिस जारी हुआ है. इसपर रेलवे प्रशासन और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के बीच विवाद गहरा गया है. मस्जिद कमेटी ने इसे फर्जी और अवैध बताया है. दावा है कि यह मस्जिद रेलवे से भी पहले की है और लगभग 1000 साल पुरानी है, जिसके दस्तावेज भी हैं.
रेलवे के नोटिस में 20 जून अंतिम तारीख है. ऐसे में हमने अंजुमन के जॉइंट सेक्रेटरी मोहम्मद यासीन ने बात की, उन्होंने कहा कि जो नोटिस मस्जिद के गेट पर चस्पा है. वो रेलवे की तरफ से ही चस्पा है हमें इसपर शक है. क्योंकि नोटिस में ना तो कोई दस्तखत है ना ही कोई मुहर. हमें शक है कि ये नोटिस लॉ एन्ड ऑर्डर डिस्टर्ब करने के लिए लगाया गया है.
अंजुमन ने इसको लेकर DM से मुलाकात की
अंजुमन ने इसको लेकर शनिवार को जिलाधिकारी से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा है. मोहम्मद यासीन ने बताया कि जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ही इस मामले का हल निकाला जाएगा. रेलवे के अधिकारियों से भी डीएम ने बात की और हम लोगों को भरोसा दिया है कि सबकुछ कानून के ही अनुसार होगा.
मोहम्मद यासीन का दावा है कि मस्जिद 1034 की है और करीब एक हज़ार साल पुरानी है. मस्जिद को रेलवे की जमीन बताया जा रहा है ये अफवाह है. 1883-84 के बंदोबस्ती में साफ साफ मस्जिद लिखा है और हमारे पास डॉक्यूमेंट है. काशी स्टेशन 1887 में अस्तित्व में आया जब डफरीन ब्रिज बन रहा था. ब्रिज के बनते समय का फ़ोटो भी प्रशासन को दिखाया है.
अब मस्जिद को लेकर अगला कदम क्या होगा?
जब डॉक्यूमेंट है तो फिर सिविल कोर्ट में हार क्यों गए? मोहम्मद यासीन कहते हैं कि ये भी एक अफवाह फैलाई जा रही है कि अगस्त 2024 में सिविल कोर्ट ने मस्जिद का मामला खारिज कर दिया था. हकीकत ये है कि मस्जिद का मसला कभी सिविल कोर्ट में गया ही नही. मस्जिद के बाहर की जमीन का मामला था, जो दोनों पक्ष की अनुपस्थिति के कारण खारिज हुआ.
अब मस्जिद को लेकर अंजुमन इंतज़ामिया का अगला कदम क्या होगा? इसपर उन्होंने कहा, ‘क्या इस बात की भी आशंका है कि 200 साल पुराने अजगैब शहीद मस्जिद जैसा हश्र कहीं गंज-ए-शहीदा मस्जिद का भी ना हो. अजगैब मस्जिद के विषय में ज्यादा नहीं जानता. लेकिन यह शहीदा थी है और रहेगी. हम हाईकोर्ट जाने पर भी विचार कर रहे हैं.