ज्ञानवापी में श्रृंगार गौरी का पूजन, बाबा विश्वनाथ सुनेंगे राम कथा; सदियों पुरानी है परंपरा
ज्ञानवापी में सदियों पुरानी श्रृंगार गौरी पूजन और बाबा विश्वनाथ के लिए राम कथा की परंपरा पुनर्जीवित हुई है. औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़े जाने के बाद 1669 में शुरू हुई यह प्रथा मुलायम सिंह सरकार में बंद हो गई थी, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुनः शुरू करवाया है. काशीवासी इस अनुष्ठान में शामिल होकर प्राचीन विरासत का सम्मान कर रहे हैं.
वाराणसी में आज सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन हुआ. इसमें काशी के संतों ने ज्ञानवापी के पश्चिमी दीवार पर विराजमान श्रृंगार गौरी का दर्शन पूजन किया. इसी के साथ मंदिर में नौ दिवसीय राम कथा का शुभारंभ हुआ. यह कथा बाबा विश्वनाथ के नैमित्त किया जा रहा है. मान्यता है कि औरंगजेब द्वारा ज्ञानवापी मंदिर तोड़े जाने के बाद सन 1669 में यह परंपरा शुरू हुई थी.
जानकारी के मुताबिक साल 1669 में औरंगजेब ने ज्ञानवापी मंदिर में तोड़फोड़ कराई थी. औरंगजेब ने मंदिर में स्थापित श्रृंगार गौरी के मंदिर और विग्रह को भी तोड़ दिया था. इसके बाद काशी के ब्राह्मणों ने श्रृंगार गौरी के विग्रह के अवशेष ज्ञानवापी के पश्चिमी दीवार पर रखकर पूजन करना शुरू किया. उसी समय से यह परंपरा निभाई जाती है. 1991 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने यहां पूजा पाठ बंद करा दिया था. अब बीते तीन साल से यह परंपरा फिर से शुरु हुई है.
रामकथा सुनते हैं बाबा विश्वनाथ
उसी समय से बाबा विश्वनाथ के नैमित्त रामकथा का आयोजन होता है. मान्यता है कि भगवान राम की कथा सुनने के लिए खुद भगवान विश्वनाथ आकर बैठते हैं. इसलिए संत भी खुद उन्हें मुख्य यजमान मानकर कथा सुनाते हैं. अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद यह रामकथा ज्ञानवापी मंदिर में विश्वनाथ मंदिर परिसर के पश्चिमी दीवार के पास गैलरी में की जाती है.
सीएम योगी ने शुरू कराई परंपरा
संतों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद इस परंपरा को नए सिरे से शुरू किया गया. इस पूजन में बड़ी संख्या में साधु सन्यासी उपस्थित होते हैं. बताया कि माता शक्ति और बाबा विश्वनाथ खुद भगवान राम की कथा में आकर बैठते हैं और कथा सुनते हैं. इस दौरान काशी की जनता भी मौजूद रहती है.