पॉलिटिकल स्टंट या चला बुलडोजर? सुर्खियों में महाश्मशान; जानें मणिकर्णिका घाट विवाद की पूरी कहानी
वाराणसी का मणिकर्णिका घाट एक वायरल वीडियो के कारण विवादों में आ गया है. वीडियो में तोड़फोड़ का दावा किया गया, जिस पर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमले शुरू कर दिए हैं. वहीं खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वीडियो पर सफाई दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सौंदर्यीकरण है, मूर्तियां सुरक्षित हैं. उन्होंने इसे भ्रम फैलाने की कोशिश बताया. उधर, पुलिस ने इस मामले में FIR भी दर्ज की है.
दुनिया का महाश्मशान, बनारस का मणिकर्णिका घाट, जहां हजारों साल चल रही चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई, जहां खुद भगवान विश्वनाथ अपने अघोर स्वरुप में प्रवास करते हैं. मान्यता है कि मौत बनारस में हो और अंतिम संस्कार इस घाट पर हो जाए तो मोक्ष निश्चित है. इसी मान्यता की वजह से देश भर से लोग अंतिम संस्कार के लिए यहां आते हैं. वहीं दुनिया भर से लोग अपने पूर्वजों की अस्थियां लेकर यहां गंगा में प्रवाहित करते हैं. आज वही मणिकर्णिका सुर्खियों में है. कथित तौर पर इस मणिकर्णिका घाट का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.
दावा किया जा रहा है कि इसके निचले हिस्से में बनी उस मढ़ी को तोड़ा जा रहा है, जहां जजमानों के साथ बैठकर पंडे-पुजारी कर्मकांड कराते हैं. दावा यह भी किया जा रहा है कि मढ़ी में बनी भीत्तियों को भी तोड़ा जा रहा है. इन भित्तियों में अहिल्याबाई होल्कर के अलावा कई कुछ देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी है. यह वीडियो किसी ने 10 जनवरी को सोशल मीडिया पर डाला था, लेकिन मकर संक्रांति के दिन अचानक यह वीडियो ट्रेंड करने लगा. तरह तरह की अफवाहें उड़ने लगी.
सीएम को करने पड़ी प्रेस कांफ्रेंस
वीडियो की जानकारी होने पर सबसे पहले रानी अहिल्याबाई के परिवार से जुड़े ट्रस्ट ने काशी का दौरा किया. ट्रस्ट के सदस्य यशवंत होल्कर ने मंडलायुक्त एस राजलिंगम से मुलाकात की. इस दौरान मंडलायुक्त ने साफ कर दिया था कि यह महज सौंदर्यीकरण है और यहां लगी सभी मूर्तियों को सुरक्षित रखवाया गया है. इन मूर्तियों को बाद में पुनर्स्थापित किया जाएगा. लेकिन इतने में स्थानीय विधायक नीलकंठ तिवारी ने घाट पर पहुंच कर सरकार और भाजपा पर हमले शुरू कर दिए. इसके बाद पहले कैबिनेट मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई दी. फिर सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद प्रेस कांफ्रेंस कर दुनिया के सामने स्थिति साफ किया.
फिर हंगामा क्यों?
वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि मढ़ी को ड्रिल मशीन से तोड़ा जा रहा है. सोशल मीडिया में वायरल इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि सरकार परंपरागत चीजों को नष्ट कर रही है. मूल स्वरुप को खत्म किया जा रहा है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस वीडियो को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला किया. कहा जाने लगा कि पहले औरंगजेब ने काशी का विध्वंस किया. उसके बाद महारानी अहिल्याबाई ने काशी का पुनरुद्धार कराया, लेकिन अब एक बार फिर बीजेपी काशी के विध्वंस में जुटी है.
अहिल्याबाई ने बनवाई मढ़ी
मुगल काल में काशी के विध्वंस के बाद अहिल्याबाई होल्कर ने मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार कराया था. उसी समय उन्होंने इस मढ़ी का भी निर्माण कराया, जहां निचले हिस्से में उनकी खुद की प्रतिमा भी लगी है. वायरल वीडियो को लेकर सीएम योगी ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यह पूरी तरह एआई जेनरेटेड है. उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के समय भी कांग्रेस के नेताओं ने वर्कशॉप की मूर्तियां दिखाकर दावा किया था कि धाम के निर्माण में इन्हें तोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि यह वीडियो जारी कर विपक्षी दल जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.
सरकार लौटा रही काशी का गौरव
सीएम योगी ने बताया कि देश और दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गोदौलिया से मैदागिन के बीच दाल मंडी सड़क का चौड़ीकरण हो रहा है. इस विकास कार्य का उद्देश्य सनातनी विरासत का संरक्षण है. लेकिन कांग्रेस हमेशा से इसमें अड़ंगा लगाती रही है. उन्होंने कहा कि इस काम को रोकने के लिए ही मणिकर्णिका घाट पर मंदिर के तोड़ने का भ्रम फैलाया जा रहा है. सीएम योगी ने आंकाड़ों के साथ बताया कि साल 2014 से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में मुश्किल से 25 हजार श्रद्धालु आते थे, अब धाम बनने के बाद औसतन डेढ़ लाख श्रद्धालु रोज काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर रहे हैं.
सीएम योगी के तेवर के बाद FIR
एक तरफ सीएम योगी ने वायरल वीडियो की सच्चाई दुनिया को बताई. विपक्ष के दावों का बिंदुवार खंडन किया. साथ ही जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पर तीखा प्रहार भी किया. वहीं दूसरी ओर, बनारस की चौक थाना पुलिस ने एआई जेनरेटेड वीडियो-फोटो का इस्तेमाल कर लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने समेत कई अन्य अरोपों में एफआईआर दर्ज किया गया है. इस एफआईआर में 8 लोग तो नामजद हैं ही, माइक्रो ब्लागिंग प्लेटफार्म एक्स के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है.
