मणिकर्निका घाट पर विवाद थम क्यों नहीं रहा? डैमेज कंट्रोल में सरकार, अब CM योगी ने संभाला मोर्चा
मणिकर्णिका घाट विवाद ने यूपी सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है. लखनऊ से लेकर वाराणसी तक, मंत्रियों से लेकर संतरी तक हर कोई डैमेज कंट्रोल में लगा हुआ है. पिछले तीन दिनों जारी विवाद जब थमता नहीं दिखा तो खुद मुख्यमंत्री योगी को बनारस पहुंचकर इसे संभलना पड़ा है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मणिकर्णिका घाट विवाद पर शनिवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर सनातन धर्म और काशी की धरोहर के खिलाफ दुष्प्रचार का आरोप लगाया. सीएम योगी ने कहा कि AI-जेनरेटेड वीडियो से भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि घाट पर विकास कार्य परंपरा के अनुरूप हो रहे हैं.
सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने सनातन धर्म और काशी की धरोहर के खिलाफ सुपारी ले ली है. एआई जेनरेटेड वीडियो से घाट पर मूर्तियों और मंदिरों के टूटने का दुष्प्रचार कर रही है. ‘इसलिए मैं काशी में ये प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा हूं ताकी इनकी साज़िश का पर्दाफाश किया जा सके.’ सीएम योगी ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की है.
मुख्यमंत्रित्व काल में दूसरी बार CM योगी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
सीएम योगी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में दूसरी बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पहली बार 15/16 मई 2018 की आधी रात को जब कैंट रेलवे स्टेशन के सामने बन रहे ब्रिज का बीम गिरा था, जिसमें 18 लोग मारे गए थे. तब सीएम योगी ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. आज दूसरी बार सीएम योगी ने मणिकर्निका घाट विवाद मामले में सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
शनिवार को सुबह 10 बजे मीडिया को अचानक से जानकारी दी गई कि सीएम योगी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. दोपहर 2:40 पर सर्किट हाउस में सीएम की प्रेस कांफ्रेंस शुरू हुई, जो करीब 40 मिनट तक चली. प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस रही. सीएम ने आश्वसत किया कि घाट पर विकास कार्य पौराणिक स्वरुप को ध्यान में रख कर किया जा रहा है.
विश्व प्रसिद्ध मणिकर्निका घाट का विवाद आखिर है क्या?
दाह संस्कार के लिए विश्व प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर नए स्वरूप का निर्माण कार्य चल रहा है. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने लगा कि घाट के निचले हिस्से में स्थापित एक मढ़ी को ड्रिल मशीन से तोड़ दिया गया. इसी मढ़ी के नीचे भित्तियों में महारानी अहिल्याबाई समेत कई प्रतिमाएं लगी थीं उनको भी तोड़ दिया गया.
इसको काशी की परम्परा और धरोहर से खिलवाड़ बताया गया. शुरू में इसको हल्के में लिया गया लेकिन देखते ही देखते सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होने लगें. विपक्ष के बड़े नेताओं ने इसे काशी की परम्परा को नष्ट करने और सनातन संस्कृति को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए केंद्र और यूपी सरकार पर जमकर निशाना साधने लगें.
मणिकर्निका यानी कि महाश्मशान, विपक्ष ने दिया तूल
बीते सोमवार को पहली बार मणिकर्निका में खंडित मूर्तियों और तोड़ फोड़ के विसुअल सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ. शुरू में लगा कि विकास कार्य के दौरान जो तोड़ फोड़ हुआ उसको कुछ सोशल मीडिया इन्फ़्लुएन्सर वायरल कर रहे हैं.
घटना शुक्रवार को घटी थी जब मणिकर्निका घाट पर तीर्थ क्षेत्र विकास परियोजना के तहत जेसीबी से खुदाई हुई थी.
लेकिन देखते ही देखते पहले सोशल मीडिया पर और फिर विपक्ष ने इसे तूल देना शुरू कर दिया. मामला काशी की मणिकर्निका से जुड़ा था. काशी यानी कि मोक्ष की नगरी और मणिकर्निका यानी कि महाश्मशान. इस तरह से एक नैरेटिव सेट होने लगा और यहीं से बीजेपी के सारे नेता, विधायक और मंत्री-संतरी सभी इसके डैमेज कंट्रोल में लग गए.
मणिकर्निका में परम्परा-धरोहरों को कोई नुकसान नहीं
सबसे पहले डीएम सत्येंद्र कुमार ने बीते गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग की और ये बताया कि काशी के मणिकर्निका घाट पर कोई तोड़ फोड़ नही हुआ है. धरोहर से कोई छेड़छाड़ नही हुई है और जो भी प्रतिमा और आकृति हटाई गई है वो विकास कार्य के बाद वहीं संरक्षित की जाएंगी. उसके बाद वाराणसी के मेयर ने मीडिया को बताया कि विपक्ष षड्यंत्र कर रहा है.
वाराणसी के मेयर, नगर आयुक्त और शहर दक्षिणी के विधायक नीलकंठ तिवारी ने भी मणिकर्निका घाट का दौरा किया और विपक्ष पर झूठा प्रॉपगेंडा फैलाने और सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि मणिकर्निका घाट पर लोगों और श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ता जा रहा है. इसलिए यहां का विकास होना जरूरी है.
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस-सपा पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के कई दशकों के शासनकाल में मणिकर्णिका घाट पर एक ईंट तक नहीं रखी गई, न ही बदली गई वो लोग यहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्य के संबंध में मीडिया में भ्रामक खबरें फैला रहे हैं. मणिकर्निका में परम्परा और धरोहरों को कोई नुकसान नहीं हुआ है.
