वाराणसी में गंगा-वरुणा नदी के किनारे बनेगा एलीवेटेड रोड, 25 हजार करोड़ होंगे खर्च, ये है पूरी डिटेल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से एलीवेटेड रोड नेटवर्क विकसित किया जाएगा. दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर बनने वाले गंगा और वरुणा एलीवेटेड कॉरिडोर शहर को जाम से राहत देंगे. इस परियोजना से बिहार, झारखंड, प्रयागराज और पूर्वांचल की ओर जाने वाले यात्रियों को शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा. बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी सुविधा मिलेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल देने वाली एक महत्वाकांक्षी योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है. दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर काशी में एलीवेटेड रोड का जाल बिछाया जाएगा, जिससे न सिर्फ शहर के भीतर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी, बल्कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी सुविधा मिलेगी.
सबसे खास बात यह है कि बिहार, झारखंड, गाजीपुर, बलिया, प्रयागराज, भदोही और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों को अब वाराणसी शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा. करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है. इसके तहत गंगा और वरुणा नदियों के किनारे आधुनिक छह लेन एलीवेटेड कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. परियोजना को पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है.
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से प्रस्तावित गंगा और वरुणा एलीवेटेड परियोजनाओं के लिए प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी है. जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने प्रभावित क्षेत्रों में भूमि संबंधी गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं. आदेश के तहत प्रभावित गांवों में अगले आदेश तक जमीन की खरीद-बिक्री, सट्टा इकरारनामा, दानपत्र, भूमि उपयोग परिवर्तन और सरकारी भूमि के आवंटन पर प्रतिबंध रहेगा.
प्रशासन का मानना है कि इससे परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की अटकलों पर रोक लगेगी. परियोजना के तहत दो बड़े एलीवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे.
- वरुणा लिंक कनेक्टर कॉरिडोर
राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से वाराणसी रिंग रोड तक
लंबाई: 21.153 किलोमीटर
छह लेन का आधुनिक एलीवेटेड कॉरिडोर वरुणा नदी के किनारे विकसित होगा. - गंगा एलीवेटेड प्रोजेक्ट
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से रिंग रोड तक
लंबाई: 18.100 किलोमीटर
छह लेन का हाईस्पीड कॉरिडोर गंगा नदी के किनारे विकसित होगा.
बाबा विश्वनाथ तक पहुंचना होगा आसान
इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य वाराणसी शहर के अंदर वाहनों के दबाव को कम करना और वैकल्पिक यातायात मार्ग उपलब्ध कराना है. इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा. अभी वाराणसी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे घंटों जाम में फंसना पड़ता है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु शहर में प्रवेश किए बिना निर्धारित पार्किंग स्थलों तक पहुंच सकेंगे और वहां से सीधे मंदिर क्षेत्र तक पहुंचने की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे.
मंत्री ने बताया पूरा रूट
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रविन्द्र जायसवाल के मुताबिक, यह परियोजना वाराणसी के ट्रैफिक सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी. उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट से आने वाला यात्री हरहुआ चौराहे से पहले एलीवेटेड फ्लाईओवर पर चढ़ जाएगा. वहां से वह सीधे वरुणा नदी किनारे सेंट्रल जेल के पास पहुंचेगा, जहां चढ़ने-उतरने की सुविधा होगी. इसके बाद यह कॉरिडोर चौकाघाट, आयुर्वेद कॉलेज, नमो घाट तक पहुंचेगा. नमो घाट के पास तीसरा इंटरचेंज विकसित किया जाएगा. यहीं से इस मार्ग को निर्माणाधीन सिग्नेचर ब्रिज से भी जोड़ा जाएगा.
इसके बाद यह मार्ग पड़ाव, मंदिर क्षेत्र के निकट प्रस्तावित पार्किंग, रामनगर के टेंगरा मोड़ तक जाएगा. मंत्री के अनुसार, मंदिर क्षेत्र के पास लगभग 4000 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग विकसित की जाएगी. इससे शहर के अंदर भारी वाहनों और लंबी दूरी के ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा. वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि शहर को जाम मुक्त करने के लिए पहले भी कई प्रयास किए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका.
मेयर ने बताया कि कैसे होगा निर्माण?
वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि इस परियोजना में कोशिश की जाएगी कि किसानों की जमीन का न्यूनतम उपयोग हो. प्राथमिकता गंगा और वरुणा नदी किनारे उपलब्ध सरकारी भूमि के इस्तेमाल पर होगी. मेयर के मुताबिक, छह लेन एलीवेटेड संरचना के लिए सामान्यतः 25 से 30 मीटर भूमि पर्याप्त होती है, जबकि रैंप, सर्विस लेन और अन्य सुविधाओं सहित कुल 45 से 60 मीटर तक भूमि की आवश्यकता पड़ सकती है.
