यूपी की 3 सीटों पर उपचुनाव क्यों नहीं? सपा-बीजेपी आमने-सामने, उठे बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की तीन सीटें महीनों से खाली हैं. 30 जुलाई को अन्य राज्यों के साथ इन सीटों पर उपचुनाव नहीं कराने को लेकर घमासान तेज हो गया है. विपक्ष का कहना है कि जब विधानसभा चुनाव में 6 महीन का समय है तो इन सीटों पर उपचुनाव क्यों नहीं कराया गया? बीजेपी का इसपर अपना तर्क है.

अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ Image Credit:

उत्तर प्रदेश की घोसी, दुद्धी और फरीदपुर विधानसभा सीटों पर लंबे समय से उपचुनाव नहीं कराए जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है. आमतौर पर किसी सीट के रिक्त होने के कुछ समय बाद चुनाव आयोग उपचुनाव की घोषणा कर देता है, लेकिन इन तीनों सीटों पर अब तक चुनाव न होने से राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए हैं.

समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को घेर रही है. सपा का आरोप है कि बीजेपी को संभावित हार का डर सता रहा है, इसलिए जानबूझकर उपचुनाव टाले जा रहे हैं. पार्टी का कहना है कि अगर चुनाव होते हैं तो जनता का मूड बीजेपी के खिलाफ जा सकता है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनावों पर भी असर पड़ेगा.

चुनाव कराना पूरी तरह EC का काम है- बीजेपी

वहीं, बीजेपी प्रवक्ता हीरो बाजपेई का कहना है कि चुनाव कराना पूरी तरह चुनाव आयोग का काम है और पार्टी हर चुनाव के लिए तैयार है. बीजेपी नेताओं का दावा है कि वे तीनों सीटें आसानी से जीत सकते हैं. हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि अंदरखाने बीजेपी उपचुनाव से बचना चाहती है, क्योंकि किसी भी हार की स्थिति में उसका राजनीतिक नैरेटिव प्रभावित हो सकता है और संगठन को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी.

‘आम चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है’

चुनाव आयोग की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि हाल के महीनों में कुछ राज्यों में चल रहे चुनावी कार्यक्रमों और प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण समय पर उपचुनाव कराना संभव नहीं हो सका. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अब आम चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है, ऐसे में अलग से उपचुनाव कराने पर पुनर्विचार किया गया है.

बीजेपी हार के डर से चुनाव से बच रही- अखिलेश

इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग और सरकार पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि अगर उपचुनाव होते तो बीजेपी प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों के सहारे चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करती. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी हार के डर से चुनाव से बच रही है.

इसके पीछे प्रशासनिक और रणनीतिक कारण!

दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव न कराए जाने के पीछे कई प्रशासनिक और रणनीतिक कारण हो सकते हैं, लेकिन इसका सीधा असर राजनीतिक बहस पर पड़ रहा है. विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे चुनाव आयोग का निर्णय बता रहा है.

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