घर में ही पढ़ने लगी थी नमाज… आगरा धर्मांतरण पर दोनों बहनों के पिता का बड़ा खुलासा

आगरा में दो बहनों के धर्मांतरण मामले में अब एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं. पीड़िता के पिता ने 'ब्रेनवॉश' का आरोप लगाया है. इस मामले में 5 देशों के कनेक्शन सामने आए हैं. पुलिस ने अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरोह का मास्टरमाइंड अभी भी फरार है.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

आगरा में सामने आए दो बहनों के धर्मांतरण और लापता मामले की परतें अब खुलने लगी है. दो सगी बहनों के के पिता ने इस मामले में बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने अपनी बेटियों के ‘ब्रेनवॉश’ का आरोप लगाया है. साथ ही बताया कि उनकी बेटियां घर में ही नमाज पढ़ने लगी थी. इस मामले में आगरा पुलिस ने 6 राज्यों में छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. हालांकि मास्टरमाइंड अभी भी फरार है.

पुलिस जांच में पता चला है कि अवैध धर्मांतरण गिरोह के तार 5 देशों से जुड़े थे. इस गिरोह को भारत में इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग की बात सामने आई है. पुलिस ने कोलकाता में छापेमारी कर लापता दोनों बहनों को बरामद किया था. दोनों बहनों के पिता ने बताया कि साल 2021 में उनकी बेटी की कश्मीर के रहने वाली सायमा से हुई थी. तब से वह हिंदू धर्म से दूर होती गई.

एमफिल की तैयारी के दौरान सायमा से दोस्ती

सदर बाजार निवासी बेटियों के पिता ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी दयालबाग से एमफिल की तैयारी कर रही थी. कॉलेज दूर होने के कारण वह दयालबाग में ही रूम लेकर पढ़ाई करती थी. इस दौरान साल 2021 में उसकी मुलाक़ात कश्मीर के उधमपुर की रहने वाली सायमा से हुई थी. साइमा लगातार उसको इस्लाम धर्म की अच्छाइयों के बारे में बताती रहती थी.

साइमा उसे मोबाइल पर वीडियो दिखाती और कहती कि हिजाब पहनने से सुरक्षा रहती है, जबकि हिंदू धर्म में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. धीरे-धीरे बड़ी बेटी को लगने लगा कि इस्लाम धर्म बेहतर है. वह घर में ही नमाज पढ़ने लगी और बाद में तो घर की पूजा-पाठ का भी खुलकर विरोध करने लगी. उन्होंने बताया कि साइमा ने उनकी बड़ी बेटी को इस्लामिक किताबें भी दी थी.

2021 में पहली बार घर से गायब हुई बड़ी बेटी

लड़की के पिता ने बताया कि साल 2021 में बड़ी बेटी अचानक घर से गायब हो गई थी. वह साइमा के कहने पर जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जा रही थी, लेकिन रास्ते में लैंडस्लाइड में फंस गई. जब किसी ने मदद नहीं की, तो उसने परिवार को फोन किया. जिसके बाद उन्होंने उसे वापस लाया. लेकिन वह लगातार साइमा के संपर्क में रहने के हिंदू धर्म से दूर होती जा रही थी.

इसके बाद परिवार ने उसका फोन छीन लिया और घर से बाहर निकलना बंद करा दिया. तब वह अपनी छोटी बहन के फोन का इस्तेमाल करने लगी. यहीं से बड़ी बेटी ने छोटी बहन का भी ‘ब्रेनवॉश’ करना शुरू कर दिया, और दोनों मिलकर इस्लाम की बातें करने लगी. इसके बाद साइमा ने उसको रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम का नंबर दिया, जो सोशल मीडिया पर धर्म परिवर्तन से जुड़े पोस्ट करता था.

दिल्ली से बिहार और फिर ले गए कोलकाता

रीत बनिक ऐसे लोगों की तलाश में रहता था, जो धर्म परिवर्तन की इच्छा रखते थे. दोनों बहनें इंस्टाग्राम के जरिए उससे बातें करने लगी. रीत बनिक ने उनसे कहा कि घर का दबाव तभी तक है, जब तक वे सनातन धर्म में हैं, इस्लाम कबूल करने के बाद एक नई जिंदगी शुरू होगी. छोटी बेटी सिर्फ 16 साल की थी इसलिए उन्होंने 2 साल तक इंतजार किया और धर्मांतरण के लिए तैयार किया.

लड़की के पिता ने बताया कि 24 मार्च, 2025 को दोनों बहनें घर से निकल गईं. रीत उर्फ इब्राहिम ने पहले दोनों बहनों को एक शख्स के पास भेजा, जहां उन्हें मस्जिद में कलमा पढ़वाया गया. इसके बाद वे ट्रेन से दिल्ली गईं और बुर्के में तीन दिन तक वहां ठहरीं. दिल्ली से वे बिहार और फिर कोलकाता पहुंचीं. कोलकाता में मौलवी के सामने दोनों बहनों ने ‘शाहदा’ करके कानूनी तरीके से इस्लाम अपनाया.

दोनों बहनों की निकाह कराने की थी तैयारी

इसके बाद बड़ी बहन का नाम अमीना और छोटी बहन का नाम जोया रख दिया गया. उन्हें मुस्लिम बस्ती में रुकवाया गया और गैंग के सदस्य मुस्लिम युवकों से उनका निकाह कराने की तैयारी में थे, ताकि वे कभी वापस अपने धर्म में न लौट सकें. इस बीच पिता ने बेटियों की गुमशुदगी की शिकायत सदर थाने में दी और साइमा पर ‘ब्रेनवॉश’ का आरोप लगाते हुए उसको नामजद किया.

पुलिस ने 41 दिन बाद, 4 मई 2025 को इस मामले में अपहरण का केस दर्ज किया, जिसमें साइमा को नामजद किया गया. डीजीपी राजीव कृष्ण ने मामले का संज्ञान लिया और पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने खुद इसकी निगरानी शुरू की. एडीसीपी सिटी आदित्य के नेतृत्व में 7 टीमें बनाई और दोनों बहनों को कोलकाता के बैरकपुर से बरामद किया. पुलिस फरार मास्टरमाइंड के तलाश में जुटी है.

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