पुलिस की नहीं, युवक को लगी दंगाइयों की गोली; ASP अनुज चौधरी के पक्ष में उतरे संभल SP
संभल हिंसा में युवक को गोली लगने के मामले में कोर्ट ने पुलिस पर FIR के आदेश दिए हैं, लेकिन एसपी केके बिश्नोई ने पुलिस का बचाव किया है. उन्होंने दावा किया कि युवक को दंगाइयों की गोली लगी है, पुलिस की नहीं. एसपी के अनुसार, पुलिस 7.65 एमएम कैलिबर की गोली का इस्तेमाल नहीं करती, जो युवक के शरीर में पाई गई है. उन्होंने गैंगस्टर शारिक साटा के गुर्गों को दोषी ठहराते हुए बताया कि उनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं.
संभल हिंसा में गोलीकांड को लेकर एक तरफ कोर्ट ने पुलिस पर एक्शन की बात कही है. तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के आदेश दिए हैं. वहीं दूसरी ओर जिले के पुलिस कप्तान केके बिश्नोई अपने मातहतों के पक्ष में खड़े हो गए हैं. उन्होंने कहा कि युवक को पुलिस की गोली लगी ही नहीं, बल्कि उसे दंगाइयों की गोली लगी है. उन्होंने कहा कि घटना के वक्त बाजार बंद था. पुलिस फोर्स तैनात थी. इसलिए यह युवक अपना ठेला लेकर घटना स्थल तक पहुंच ही नहीं सकता था.
उन्होंने युवक के पिता द्वारा कोर्ट में बताई कहानी पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि सुरक्षा घेरे में युवक अपना ठेला लेकर जामा मस्जिद कैसे पहुंच गया. उन्होंने संभल हिंसा की कहानी बताते हुए कहा कि पुलिस ने चारो ओर से रास्ता बंद किया था. ऐसे में दंगाई जामा मस्जिद के पीछे वाले रास्ते से आए और पुलिस पर पथराव और फायरिंग की थी. इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और बवालियों को खदेड़ा था.
शारिक साटा के गुर्गों ने चलाई गोली
एसपी ने बताया कि युवक के शरीर में जो गोली पायी गई है, वह 7.65 एमएम की है. पुलिस इस कैलिबर की गोली इस्तेमाल ही नहीं करती. ऐसे में जाहिर है कि युवक को जो गोली लगी है, वो पुलिस की है ही नहीं. एसपी केके बिश्नोई ने साफ कर दिया कि युवक को जो गोली लगी है, वह गैंगस्टर शारिक साटा के गुर्गों ने चलाई थी. पकड़े जाने के बाद इन गुर्गों के पास से पुलिस ने वह हथियार भी बरामद कर लिए हैं, जिनसे यह गोली चली है.
न्यायिक जांच में मिली क्लीनचिट
उन्होंने पुलिस पर लगाए सभी आरोपों को खारिज किया. कहा कि ये आरोप निराधार हैं. उन्होंने बताया कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में भी साफ हो चुका है कि पुलिस की गोली से कोई घायल नहीं हुआ. बल्कि दंगाइयों की फायरिंग और पथराव से 29 पुलिसकर्मी जरूर घायल हुए थे. डीएम संभल ने भी युवक की कहानी को हास्यास्पद बताया. कहा कि युवक सुबह 8 बजे घर से निकलने की बात कह रहा है, जबकि उस दिन धारा 163 लागू थी. जामा मस्जिद के चारो ओर थ्री लेयर सुरक्षा थी. आवाजाही पूरी तरह बंद थी. ऐसे में कोई व्यक्ति कैसे ठेला लेकर जामा मस्जिद तक पहुंच सकता है.
22 पुलिस कर्मियों पर एफआईआर के हुए आदेश
संभल जिला अदालत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने युवक के पिता की अर्जी पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं. युवक के पिता ने इस मामले में कोतवाली थाना प्रभारी अनुज तोमर को भी नामजद किया है. हालांकि एसपी संभल ने कहा कि अभी तक कोर्ट का आदेश उन्हें मिला नहीं है. आदेश मिलने पर इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई होगी. उधर, युवक के पिता ने बताया कि कोर्ट के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है. उन्होंने बताया कि उनके बेटे को तीन गोलियां लगी थीं. दो गोलियां पीठ व एक हाथ में लगीं.