कफ सिरप केस: SIT को बड़ी सफलता, शुभम जायसवाल गैंग के 5 सदस्य गिरफ्तार; भाग रहे थे नेपाल
कोडीन कफ सिरप की अवैध तस्करी मामले में SIT को बड़ी सफलता मिली है. मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के 5 करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है. इन आरोपियों में तीन इनामिया भी शामिल हैं, ये सभी नेपाल भागने की फिराक में थे. पुलिस ने मिर्जापुर बाईपास से दबोचा है.
कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी मामले में वाराणसी SIT ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. कोतवाली पुलिस और SIT की टीम ने रविवार को इस मामले में पांच आरोपियों को दबोचा है, ये सभी गैंग के सरगना शुभम जायसवाल के करीबी हैं. इनमें से तीन पर 25-25 हजार के इनाम घोषित थे, जिन्होंने 25 लाख से ज़्यादा कफ सिरप की शिशियां बेची थी.
डीसीपी (काशी जोन) गौरव बंसवाल ने बताया कि आरोपी नेपाल भागने के फिराक में थे. सभी के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी था. कोतवाली पुलिस और SIT की टीम ने सभी आरोपियों को मिर्जापुर बाईपास से गिरफ्तार किया है. पूछताछ में पता चला कि इन लोगों ने कफ सिरप की शिशियों की तस्करी कर हवाला के जरिये करीब 40 करोड़ रुपये जुटाए थे.
आरोपियों पर BNS और NDPS एक्ट में मुकदमा
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सोनिया निवासी अमित जायसवाल, खोजवा निवासी दिवेश जायसवाल, अंकुश सिंह (तीनों पर 25-25 हजार का इनाम) था. वहीं, दो अन्य आरोपियों की पहचान घनश्याम और भेलूपुर के नवाबगंज निवासी अभिनव यादव के रुप में हुई है. इनके ख़िलाफ बीएनएस की धारा और एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि विकास सिंह जो कि जौनपुर का रहने वाला है, उसके साथ अमित सिंह टाटा, प्रशान्त उपाध्याय, आकाश पाठक, गौरव जायसवाल, मनोज यादव (सिन्डीकेट), दिवेश जायसवाल, अंकुश सिंह व अन्य लोगो की मीटिंग शुभम जायसवाल के द्वारा महमूर गंज स्थित अपने के बीएन प्लाजा पर की जाती थी.
बीएन प्लाजा पर प्लानिंग, फिर ऐसे होता था धंधा
बीएन प्लाजा पर सभी लोग जमा होते थे, जहां पर न्यू फैन्सिडिल कफ सीरप की तस्करी और पैसा आदि कैसे बैंक में जमा कराना है, इन सभी पर चर्चा होती थी. इन लोगों के फर्मों पर माल कम आता था. ज़्यादा माल की तस्करी शुभम जायसवाल और प्रशान्त उपाध्याय सिण्डिकेट के मनोज यादव, प्रतीक कुमार गुजराती, धर्मेन्द्र अग्रवाल के माध्यम से करते थे.
पुलिस को आरोपियों ने यह भी बताया कि इन लोगों के द्वारा खुलवाई गई फर्मों मे शुभम जायसवाल और प्रशान्त उपाध्याय मिलकर दिनेश यादव, आशीष यादव, स्वप्निल केसरी और अन्य लोगों से नकद पैसा RTGS के माध्यम से जमा कराते थे. फिर वे पैसा दूसरे फर्मों में भेजा जाता था, फिर उन फर्मों द्वारा वही पैसा शुभम जायसावल को वापस मिल जाता था.