अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच CM योगी का बड़ा बयान, किसे बताया कालनेमि?

योगी आदित्यनाथ आज हरियाणा के सोनीपत में नागे बाबा मंदिर के एक कार्यक्रम पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नही होती. उन्होंने आगे कहा कि ऐसे बहुत कालनेमि हैं जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साज़िश रचते हैं. उनसे हमें सतर्क रहना होगा.

सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) Image Credit:

प्रयागराज में प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद के बीच यूपी के मुख्यमंत्री सीएम योगी का एक बयान आया है. वह हरियाणा के सोनीपत नागे बाबा मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह और आठ मान का भव्य भण्डारा कार्यक्रम पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि एक योगी ,एक संत, एक सन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नही होती. धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है. राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. ऐसे बहुत कालनेमि हैं जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साज़िश रचते हैं. उनसे हमें सतर्क रहना होगा.

सीएम योगी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आज गुलामी की बेड़ियां टूट गई है अयोध्या में भव्य सनातन पताका फहरा रहा है. आज से दस साल पहले काशी विश्वनाथ धाम में एक साथ दस लोग नही जा सकते थे. वहां आज डेढ़ से 2 लाख श्रद्धालु रोज दर्शन करते हैं. प्रयागराज में सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिल रहा है. यह संतो का प्रताप है, जिससे श्रद्धालुओं का सम्मान हो रहा है.

मौनी अमावस्या के दिन हुआ था विवाद

बता दें कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद हुआ था. प्रशासन पालकी से उतर कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान के लिए पैदल जाने को कह रहा था. इस दौरान पुलिस और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच तीखी बहस हो गई. आरोप है पुलिस ने इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट की. उन्हें घसीटा. इससे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज होकर शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए.

प्रशासन ने भेजा पहला नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद ने भेजा 8 पेज का जवाब

प्रयागराज प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह विवाद बढ़ते ही जा रहा है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर पूछा था कि वह अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है.अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 घंटे में मेला प्रशासन को 8 पेजों का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा था. उन्होंने नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि जिससे अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका जाए.

प्रशासन ने पूछा था- क्यों ना आपकी मेला क्षेत्र में एंट्री बैन की जाए

इसके बाद प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजकर पूछा कि क्यों ना आपकी एंट्री मेला क्षेत्र में हमेशा के लिए बैन कर दिया जाए. आपको मेला क्षेत्र में दी गई जमीन को निरस्त कर दिया जाए, क्योंकि आपके मेले की व्यवस्था खराब हुई. लोगों की सुरक्षा पर खतरे में पड़ी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस नोटिस का जवाब भी प्रशासन को को भेज दिया है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद दूसरे नोटिस का दिया ये जवाब

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस के जवाब में कहा कि पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा 2500 साल पुरानी है और शंकराचार्य के काल से है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने, अनुयायियों के साथ मारपीट और अपमान करने का आरोप लगाया है.