घोसी, फरीदपुर और दुद्धी… UP में विधानसभा चुनाव से पहले इन तीन सीटों पर उपचुनाव तय
2027 विधानसभा से पहले उत्तर प्रदेश के घोसी, फरीदपुर और दुद्धी सीट पर उपचुनाव होना लगभग तय है. दरअसल, इन तीनों सीटों पर काबिज रहे विधायकों का निधन हो गया है. ऐसे में ये सीटें खाली हो गई हैं. इस स्थिति चुनाव आयोग के ऊपर इन सीटों पर 6 महीने के अंदर चुनाव कराने की जिम्मेदारी है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तीन सीटों पर उपचुनाव होना तय है. दरअसल, मऊ की घोसी से MLA सुधाकर सिंह, बरेली की फरीदपुर से MLA श्याम बिहारी और सोनभद्र की दुद्धी सीट से MLA विजय सिंह गोंड का निधन हो गया है. अभी विधानसभा चुनाव में एक साल का वक्त है, ऐसे में इन सीटों पर 6 महीने के अंदर चुनाव आयोग को उपचुनाव कराना होगा. सबसे अहम बात यह है कि इन तीन में से दो सीटों (घोसी और दुद्धी) पर 5 साल के अंदर दूसरी बार उपचुनाव होगा.
हालांकि चुनाव आयोग ने अभी इन पर आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की है, लेकिन सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इन तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीधी टक्कर का अखाड़ा बन सकते हैं, क्योंकि ये सीटें अलग-अलग क्षेत्रों और जातीय समीकरणों का प्रतिनिधित्व करती हैं. सबसे पहले बात करते हैं मऊ की घोसी विधानसभा सीट की. यह सीट सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई है.
घोसी सीट: सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती
मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट पूर्वांचल की महत्वपूर्ण सीटों में शुमार है. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के दारा सिंह चौहान ने जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में वे भाजपा में चले गए और सीट खाली हो गई. 2023 के उपचुनाव में सपा के सुधाकर सिंह ने भाजपा के दारा सिंह चौहान को बड़े अंतर से हराकर सीट पर कब्जा जमाया. सुधाकर सिंह कट्टर समाजवादी नेता थे और चार बार विधायक रह चुके थे. पिछले साल नवंबर में उनका निधन हो गया था.
सपा ने सुधाकर सिंह के निधन के बाद उनके बेटे सुजीत सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया. पार्टी महासचिव शिवपाल यादव ने इसकी घोषणा की थी और कहा कि सुजीत की जीत पक्की है. सपा ने यह फैसला सिम्पैथी वोट हासिल करने के लिए किया, क्योंकि सुधाकर सिंह का क्षेत्र में मजबूत जनाधार था. भाजपा के लिए यह सीट चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि 2023 के उपचुनाव में यहां उसे हार का सामना करना पड़ा था. पार्टी अभी उम्मीदवार की तलाश में है.

फरीदपुर सीट: अपना किला बचाने उतरेगी बीजेपी
बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से बीजेपी नेता श्याम बिहारी लाल दूसरी बार विधायक बने थे. उनका जनवरी 2026 में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया. पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नेता उनके परिवार से किसी सदस्य को टिकट देने की मांग कर रहे हैं, ताकि सहानुभूति वोट मिल सके. फरीदपुर में ब्राह्मण और अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रभाव ज्यादा है. 2022 में श्याम बिहार लाल ने सिर्फ 2,921 से जीत दर्ज की थी. दूसरे नंबर पर सपा थी. उपचुनाव में भाजपा अपनी सीट बचाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी, क्योंकि यह सीट पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है.
दुद्धी सीट: विजय सिंह गोंड की विरासत कौन संभालेगा?
सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा सीट से सपा विधायक विजय सिंह गोंड का निधन हो गया. वह आठ बार के विधायक थे. विजय सिंह गोंड ने 1980 से लेकर 2002 तक सात बार चुनाव जीता था, लेकिन 2007 से 2022 तक वह लगातार चार चुनाव हारे थे. 2024 में इस सीट से बीजेपी विधायक रामदुलार गौड के अयोग्य करार दिए जाने के बाद हुए उपचुनाव में सपा के टिकट विजय सिंह गोंड जीतकर आठवीं बार विधायक बने थे. अब इस सीट पर भी उपचुनाव होना तय है.
सत्ता का सेमीफाइनल होगा ये उपचुनाव
चुनाव आयोग नियम के अनुसार सीट खाली होने के छह महीने के अंदर उपचुनाव कराना जरूरी है, इसलिए अप्रैल-मई 2026 तक इनकी तारीखें घोषित हो सकती हैं. ये उपचुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाएंगे, बल्कि इन सीटों के नतीजे 2027 की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सपा इनमें से दो सीटें भी जीत लेती है, तो विपक्ष का मनोबल बढ़ेगा, जबकि भाजपा की जीत सरकार की मजबूती का संदेश देगी.
