SIR: वोटर लिस्ट से जिनका नाम कटा, उनकी ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे ‘PDA प्रहरी’; अखिलेश का ऐलान

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से नाम कटने का मामला गरमाया हुआ है. समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐलान किया, 'PDA प्रहरी घर-घर जाकर यह पता लगा रहे हैं कि किसका नाम वोटर लिस्ट से कटा, कब कटा और किस आधार पर कटा... हर बूथ की लिस्ट, हर गांव की रिपोर्ट और हर विधानसभा का डेटा तैयार किया जा रहा है.'

सपा ने PDA प्रहरी के नाम से शुरू किया अभियान (सांकेतिक तस्वीर-AI)

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी भूचाल आता दिख रहा है. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान मतदाताओं के कथित नाम कटवाने के आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने मोर्चा खोल दिया है. सपा का आरोप है कि योजनाबद्ध तरीके से PDA समाज के वोटरों को सूची से बाहर किया जा रहा है. पार्टी अब ग्राउंड की रिपोर्ट बनाकर निर्वाचन आयोग और सरकार को घेरने की तैयारी में है. आइए जानते हैं मामला क्या है? और सपा क्या करने वाली है?

हर चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR एक नियमित प्रक्रिया मानी जाती है. इसका मकसद गलत, डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के नाम हटाना और योग्य मतदाताओं को जोड़ना होता है. उत्तर प्रदेश में SIR के बाद ड्राफ्ट प्रकाशन लिस्ट आए तो करीब 2 करोड़ 89 लाख वोटर के नाम कट गए, जिसको लेकर सपा लगातार सवाल खड़े कर रही है. सपा का दावा है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे वोटरों के नाम काटे गए हैं, जो जिंदा हैं.

सपा ने PDA प्रहरी के नाम से शुरू किया अभियान

सपा का आरोप है कि वोटर लिस्ट से कटे नामों में सबसे ज्यादा PDA समाज यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाता शामिल हैं. पार्टी इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बता रही है. इसी आरोप के साथ समाजवादी पार्टी ने ‘PDA प्रहरी’ नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसमें कार्यकर्ताओं को गांव-गांव, मोहल्ला-मोहल्ला भेजा गया है, ताकि कटे वोटरों का रिकॉर्ड इकट्ठा किया जा सके.

घर-घर जाकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करेंगे PDA प्रहरी

PDA प्रहरी घर-घर जाकर यह पता लगा रहे हैं कि किसका नाम वोटर लिस्ट से कटा, कब कटा और किस आधार पर कटा… हर बूथ की लिस्ट, हर गांव की रिपोर्ट और हर विधानसभा का डेटा तैयार किया जा रहा है. सपा का दावा है कि यह सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि दस्तावेजों के साथ तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट होगी. सपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि यह कोई प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश है.

सड़क से लेकर कोर्ट तक की लड़ाई लड़ेगी सपा

अखिलेश यादव का आरोप है कि PDA समाज के वोटरों के नाम योजनाबद्ध तरीके से हटाए जा रहे हैं, हम चुप नहीं बैठेंगे, समाजवादी पार्टी हर कटे वोटर के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेगी. सपा नेतृत्व साफ कर चुका है कि अगर निर्वाचन आयोग से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो यह मुद्दा राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है. पार्टी आरोप लगा रही है कि वोटर लिस्ट के जरिए चुनावी गणित बदलने की कोशिश हो रही है.

सपा इसे बना सकती है चुनावी मुद्दा

निर्वाचन आयोग पहले भी साफ कर चुका है कि SIR के दौरान किसी भी मतदाता को आपत्ति दर्ज कराने और नाम जुड़वाने का पूरा मौका दिया जाता है. हालांकि, सपा का कहना है कि जमीनी हकीकत आयोग के दावों से अलग है और इसी अंतर को उजागर करने के लिए PDA प्रहरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वोटर लिस्ट का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है, अगर विपक्ष इसे जनआंदोलन का रूप देता है, तो यह विवाद सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह चुनावी मुद्दा बन सकता है.