अखिलेश ने अपने मंदिर में लगाई भगवान श्रीराम की मूर्ति, AIMIM भड़की- ‘मुसलमानों को गुलाम समझते हैं’; बीजेपी ने भी सवाल खड़े किए

अखिलेश यादव ने इटावा में केदारेश्वर मंदिर बनवाया है, जिसमें प्रभु राम की मूर्ति स्थापित की गई है. इस कदम को उनकी 'सॉफ्ट हिंदुत्व' रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. AIMIM ने इसे 'हिंदुत्व की राजनीति' और बीजेपी ने 'सपा की अवसरवादी राजनीति' करार दिया है. इस पर सियासी घमासान तेज है.

2027 चुनाव और सपा की हिंदुत्व रणनीति! सियासी घमासान तेज Image Credit:

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने गृह जिला इटावा में केदारेश्वर मंदिर का निर्माण कराया है. यह मंदिर केदारनाथ धाम की तर्ज पर बनाया जा रहा है, जिममें प्रभु राम की मुर्ती स्थापित की गई है. उन्होंने भगवान श्रीराम की सुंदर मूर्ति लगाए जाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी, जिससे सपा हिंदुत्व राजनीति पर निशाने पर है.

यह कदम अखिलेश के ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति बताई जाई है. मंदीर के भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की मुर्ती स्थापित की गई है. इसे अयोध्या धाम से देखा जा रहा है. इस पोस्ट पर AIMIM और बीजेपी दोनों ही दलों ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. AIMIM ने ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करार दिया, जबकि बीजेपी इसे ‘सपा की अवसरवादी राजनीति’ बता रही है.

मुसलमान उनके लिए विकल्प रह गया है- AIMIM

अखिलेश यादव ने मंदिर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- ‘प्रभु राम की अभिराम मूर्ति : निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर, इटावा.’ रामनवमी के अवसर पर मंदिर में मुर्ती की स्थापना हुई है. AIMIM के पूर्वांचल अध्यक्ष इसरार अहमद ने अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, ‘अखिलेश मुसलमानों को अपना गुलाम समझते हैं.’

इसरार अहमद ने कहा योगी सरकार में 14 हजार से अधिक एनकाउंटर हुए, अखिलेश ने कभी मुसलमानों के लिए आवाज नहीं उठाई. अब अखिलेश इस तरह एजेंडे से घिर गए हैं कि वो राम मंदिर की बात कर रहे हैं और मुसलमानों की भावना की कोई कदर नहीं कर रहे. अखिलेश अब हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं, मुसलमान उनके लिए विकल्प रह गया है.

इसरार अहमद ने निशाना साधते हुए आगे कहा कि अखिलेश अयोध्या में राम मंदिर जाने को कहते हैं, अपने यहां मंदिर में राम की मूर्ति लगाते हैं. उनके पिता ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद की हिफाजत के लिए गोली चलवा दी थी. सपा की रणनीति पर सियासी घमासान तेज है. बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी हमला बोला है.

सपा के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे- केशव मौर्य

केशव प्रसाद मौर्य ने तंज कसते हुए X पर लिखा, ‘बीजेपी के भय से पहले मंदिर बनवाना और अब प्रभु श्रीरामलला की मूर्ति लगवाने की चर्चा करना, यह समाजवादी पार्टी की ‘अवसरवादी’ राजनीति का नया चेहरा है. विडंबना यह है कि जिस सपा और सपाइयों के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे लगे हों, वे आज रामभक्ति का स्वांग रच रहे हैं.’

उन्होंने सपा की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा यदि वास्तव में आस्था का सम्मान होता और नीयत सही होती तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह को हटाकर भव्य मंदिर की बात करते और बाबरी समर्थकों के खिलाफ भी आवाज उठाते. दुविधा में फंसे सपा बहादुर और उनकी सपा न तो रामभक्तों का विश्वास पाएगी और न ही अपना कथित वोट बैंक बचा पाएगी.

बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी कहा कि ‘समाजवादी पार्टी का रक्तरंजित इतिहास देश नहीं भूला है. अब केदारेश्वर मंदिर के नाम पर स्वांग रच रहे हैं.’ राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में सपा हिंदुत्व की छवि बनाने की कोशिश कर रही है, जिस पर विपक्षी दल हमलावर हो गए हैं. दोनों तरफ से बयानबाजी तेज होने के आसार हैं.

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