राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा खुलासा, 5 जून को ही बरामद हुए थे 58 लाख, फिर 20 दिन तक क्यों नहीं हुई FIR?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. 5 जून को ही 58 लाख रुपये बरामद हुए, फिर भी 20 दिनों तक FIR दर्ज नहीं हुई. इस देरी ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा की सवालों की बौछार तेज हो गई है.

फाइल फोटो Image Credit:

अयोध्या, राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन के मामले में अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, चोरी का मामला सार्वजनिक होने से पहले ही ट्रस्ट को इसकी जानकारी मिल गई थी. बताया जा रहा है कि 4 जून को ट्रस्ट के पदाधिकारियों को गड़बड़ी की सूचना मिली थी. इसके अगले ही दिन करीब 58 लाख रुपये बरामद भी कर लिए गए थे.

सूत्रों के मुताबिक, 5 जून को ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने SIS कम्पनी के मन्दिर के सुरक्षा में लगे सुरक्षाकार्मियों और पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों के घरों से करीब 58 लाख रुपये बरामद कर लिए थे, जबकि शेष रकम आरोपियों ने अपने बैंक खातों से निकलवाकर 8 जून तक ट्रस्ट को लौटा दी थी. लेकिन इतना होने के बाद भी 20 दिन तक FIR दर्ज नहीं कराई गई.

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर सवालों की बौछार

अब इसको लेकर मंदिर ट्रस्ट और ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, कई मामलों में आरोपियों ने खुद रकम सौंप दी, जिस पर उनके परिजनों के हस्ताक्षर भी कराए गए. जिन आरोपियों के खातों में रकम जमा थी, उनसे बैंक से पैसे निकलवाकर ट्रस्ट को सौंपे गए.

सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि चढ़ावे की गिनती में लगे कुछ कर्मचारी लंबे समय से रकम में हेराफेरी कर रहे थे. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक चोरी की रकम बरामद राशि से कहीं अधिक हो सकती है. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और संभावित बड़े वित्तीय नुकसान की भी पड़ताल कर रही हैं. वहीं, संदेह की सूई टिन्नू यादव पर अटका है.

टिन्नू यादव को सामान ठिकाने लगाने का मौका मिला?

सूत्रों का कहना है कि टिन्नू यादव के पास चढ़ावे में मिली धातुओं के मिलने की भी बात सामने आई है. हालांकि दिलचस्प यह है कि जब अन्य आरोपियों के घर जाकर रिकवरी की जा रही थी, तब पहले दिन टिन्नू के घर टीम नहीं पहुंची. आरोप है कि पूछताछ के बाद उसने केवल एक लाख रुपये मंगवाकर दिए, जिससे उसे सामान ठिकाने लगाने का मौका मिला.

मामले में एक और अहम तथ्य सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, रिकवरी अभियान के दौरान ट्रस्ट के आधिकारिक वाहन का इस्तेमाल नहीं किया गया. ट्रस्ट के वाहन के बाहर जाने पर लॉगबुक में प्रविष्टि करना अनिवार्य होता है. ऐसे में पदाधिकारी निजी वाहनों से आरोपियों के घर पहुंचे, जिससे पूरे अभियान की कोई आधिकारिक वाहन रिकॉर्डिंग नहीं हो सकी है.

सपा प्रमुख ने उठाया था मामला, अब तक 8 गिरफ्तार

बताया जा रहा है कि 6 जून तक यह मामला समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता पवन पांडे के माध्यम से अखिलेश यादव तक पहुंच गया था. इसके बाद 7 जून को अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. हालाकिं,चंपत राय ने देर शाम इसका खंडन किया और इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ.

इसके बाद सीएम ने ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT का गठन किया. SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चम्पत राय और अनिल मिश्रा सहित 40 से अधिक लोगों की भूमिका संदेश पाई गई. उसके 25 जून को आठ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा ट्रस्ट दर्ज कराया जिनको देर शाम तक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. जबकि कुछ नाम अज्ञात से पूछताछ भी शुरू हो गई.

आरोपो के बीच 26 जून को ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया. प्रारंभिक जांच के बाद अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी हो चुकी है. मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, एफआईआर में देरी और रिकवरी की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

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