कहां इस्तेमाल हुई चढ़ावे की रकम? जांच करते जेल पहुंची पुलिस, अविनाश शुक्ला से 2 घंटे हुई पूछताछ
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब ऐसे दौर में पहुंच गई है, जहां पुलिस सिर्फ आरोपियों के बयान पर नहीं, बल्कि बैंक रिकॉर्ड, संपत्तियों और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में पुलिस ने जेल में आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ की.
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी कांड की जांच अब उस पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां पुलिस सिर्फ बरामदगी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे नेटवर्क की आर्थिक परतें खोलने की तैयारी में है. इसी कड़ी में मंगलवार को अदालत की अनुमति लेकर जांच टीम जिला कारागार पहुंची. यहां पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक गहन पूछताछ की. अधिकारियों का फोकस इस बात पर रहा कि चोरी का पैसा आखिर कहां गया, किसके पास पहुंचा और उससे क्या-क्या खरीदा गया.
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने चोरी में अपनी भूमिका स्वीकार की, लेकिन यह गोरखधंधा कब से चल रहा था, इस सवाल पर वह गोलमोल जवाब देता रहा. पुलिस ने उससे चोरी की रकम के इस्तेमाल, बैंक खातों, निवेश, बीमा पॉलिसियों और कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियों के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई है. अब आरोपी के बयान का बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है, ताकि किसी भी दावे की पुष्टि की जा सके.
आमने सामने भी होगी पूछताछ
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि जेल में हुई पूछताछ से कई नई कड़ियां सामने आएंगी. यही वजह है कि आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. यदि अदालत से अनुमति मिलती है तो आमने-सामने पूछताछ के साथ उन स्थानों का भी सत्यापन कराया जाएगा, जहां चोरी की रकम खर्च होने या छिपाए जाने की आशंका है. पुलिस नई बरामदगी की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है.
प्रतापगढ़ तक पहुंची जांच
मामले की जांच अब अयोध्या की सीमा से बाहर निकलकर प्रतापगढ़ तक पहुंच चुकी है. अविनाश शुक्ला के पैतृक गांव बाबूपुर और उससे जुड़ी अन्य संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है. साथ ही उसके बैंक खातों, निवेश योजनाओं और वित्तीय लेनदेन की भी गहन पड़ताल की जा रही है, ताकि चोरी के पैसों का पूरा ट्रेल सामने आ सके. उधर, एसबीआई की तुलसी उद्यान शाखा में राम मंदिर ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए समझौते का अध्ययन करने के बाद नकदी गणना में लगे कर्मचारियों से पूछताछ शुरू हो गई है.