बागपत में पिता-पुत्र की हत्या करने वाले हिस्ट्रीशीटर वरूण लुहारी की भी मौत, वारदात के बाद भीड़ ने किया था हमला
बागपत में मंगलवार यानी 09 जून को हिस्ट्रीशीटर वरूण लुहारी ने अपने साथियों के साथ मिलकर व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल (55) और उनके बेटे विकास अग्रवाल (30) की गोली मारकर हत्या कर दी थी. वारदात को अंजाम देने के बाद वह भीड़ के हत्थे चढ़ गया. भीड़ द्वारा पिटाई में वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया था. अब अस्पताल में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया.
बड़ौत के दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित मुख्य बस स्टैंड पर मंगलवार को दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग से पूरा शहर दहल उठा. हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी अपने साथियों के साथ आर्य टेंट हाउस में घुस गया और वहां मौजूद कारोबारी परिवार को निशाना बनाकर गोलियां बरसा दीं. हमले में टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल (55) और उनके बेटे विकास अग्रवाल (30) की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए.
घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने हमलावरों को घेर लिया. फिर हमलावरों की पिटाई कर दी. इसमें गंभीर रूप से घायल हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई है. घटना बड़ौत कोतवाली क्षेत्र की मुख्य पुलिस चौकी से करीब 50 मीटर दूरी पर हुई, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. वारदात के बाद पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई और व्यापारी वर्ग सड़कों पर उतर आया.
अचानक से कारोबारी और उसके बेटे पर हमलावरों ने कर दी फायरिंग
दुकान के भीतर बैठे सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास को कई गोलियां लगीं. गोलीबारी होते ही आसपास के लोगों में भगदड़ मच गई. बाजार की दुकानें बंद होने लगीं और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. कुछ ही मिनटों में पूरा क्षेत्र युद्धक्षेत्र जैसा दिखाई देने लगा.
अस्पताल ले जाते समय पिता-पुत्र ने तोड़ा दम
घटना के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. चिकित्सकों ने सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास को मृत घोषित कर दिया. दूसरी ओर घटना में घायल हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे गम्भीर हालत के मेरठ हायर सेंटर रेफर कर दिया गया था. लेकिन उसकी भी मौत हो गई.
2015 की रंजिश बनी खूनी वारदात की वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच करीब दस वर्ष पुरानी रंजिश चली आ रही थी. वर्ष 2015 में दिल्ली बस स्टैंड स्थित न्यू आर्य टेंट हाउस पर भी इसी तरह की फायरिंग हुई थी. उस घटना में वरुण लुहारी के भाई कपिल (पिंटू) पुत्र बाबूराम की मौत हो गई थी. बताया जाता है कि उसी मामले के बाद दोनों पक्षों के बीच लगातार तनाव बना हुआ था. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पुरानी दुश्मनी और बदले की भावना ने इस घटना को जन्म दिया.
गैंगस्टर एक्ट में हुई थी संपत्ति कुर्क
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वरुण लुहारी बड़ौत कोतवाली का घोषित हिस्ट्रीशीटर था. उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, रंगदारी और मारपीट समेत करीब 19 मुकदमे दर्ज थे. वर्ष 2023 में गैंगस्टर एक्ट के तहत उसकी संपत्ति कुर्क की गई थी, जिसके बाद उसका परिवार देहरादून में रहने लगा था. बताया जा रहा है कि वह एक मुकदमे में तारीख पर पेश होने के लिए मंगलवार को बागपत आया था और इसी दौरान यह खूनी संघर्ष हो गया.
पिता बाबूराम गिरफ्तार, 10 टीमें गठित
मृतकों के परिजनों की तहरीर पर बड़ौत कोतवाली में हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने नामजद आरोपी और वरूण लुहारी के पिता बाबूराम को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस अधीक्षक बागपत सूरज राय ने बताया कि मामले की जांच के लिए 10 विशेष टीमों का गठन किया गया है. फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
व्यापारियों में रोष, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मुख्य बाजार और पुलिस चौकी के पास हुई इस वारदात के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश है. व्यापारियों का कहना है कि यदि हिस्ट्रीशीटरों पर प्रभावी निगरानी होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती. घटना के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है.