‘Sir, ballia become bagi…’ भीड़ पर दौड़ाया घोड़ा, फिर क्यों जान की भीख मांगने लगा कोतवाल? DM ने भेजी रिपोर्ट
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बलिया की बगावत दुनिया ने देखी. उस समय क्रांतिवीरों ने जब कलेक्ट्रेट और डाकघर पर कब्जा किया तो कोतवाल ने उनके ऊपर घोड़े दौड़ा दिए. इसके बाद बलिया वालों ने कोतवाल का ऐसा हाल किया कि वह जान की भीख मांगने लगा. उस समय तत्कालीन डीएम ने ब्रिटिश सरकार को रिपोर्ट भेजी कि 'सर, बलिया बागी हो चुका है'.
आज पूरे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा है. लाल किला मैदान से लेकर हर जिला मुख्यालय और पुलिस लाइनों में परेड और तिरंगे को सलामी दी जा रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश का बलिया आज भी वैसे ही बेफिक्र और बिंदास नजर आ रहा है, जैसा 1942 में था. ऐसा हो भी क्यों नहीं, ब्रेफिक्र अंदाज और तेवर में बगावत ही तो बलिया वालों की पहचान है. इसलिए तो कहा जाता है कि वीरों की धरती, जवानों का देश, बागी बलिया उत्तर प्रदेश.
इस आजादी के जश्न में मौका है, मौसम और दस्तूर भी है, आइए, हम एक बार फिर अगस्त 1942 की उस घटना को याद कर लेते हैं, जिससे बलिया की बगावत पर सरकारी मुहर लगी और बरतानिया हुकूमत ने आधिकारिक तौर पर बलिया को बागी घोषित किया था. दरअसल, आजादी के आंदोलन के दौरान 8 अगस्त 1942 को मुंबई में गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया था. इस नारे को सुनकर बलिया वाले कन्फ्यूज हो गए थे. उन्हें समझ नहीं आया कि करें क्या और मरें कैसे? लोगों ने बलिया में विद्रोह शुरू कर दिया.
15 अगस्त को फूंक दिया थाना
13 अगस्त को बलिया वालों ने कलक्ट्रेट और टाउनहॉल पर कब्जा कर लिया था. 14 अगस्त की सुबह सुबह ही क्रांतिवीर डाकघर पहुंच गए और सारा खजाना लूट लिया. उस दिनों समय शहर कोतवाली में एक मनबढ़ थानेदार की तैनाती थी. अंग्रेजों को खुश करने के लिए उसने क्रांतिवीरों की भीड़ पर घोड़े दौड़ा दिए. इससे गुस्साई भीड़ ने कोतवाल को घेर लिया. इसके बाद तो कोतवाल वह हाथ जोड़ कर जान की भीख मांगता नजर आया. फिर अगले दिन यानी 15 अगस्त को एक बार फिर क्रांतिवीरों की टोली बैरिया कोतवाली के बाहर जमा हुई और देखते ही देखते थाने में आग लगा दी गई.
डीएम ने सरकार को भेजी रिपोर्ट
इस घटना के बाद बलिया में मौजूद अंग्रेज आतंकित हो गए. खुद बलिया के तत्कालीन डीएम जगदीश्वर निगम की ऐसी हालत हो गई कि वह दफ्तर से निकलने में भी उन्हें डर लगने लगा. इन परिस्थितियों में उन्होंने वायसराय और ब्रिटिश सरकार को बलिया के हालात से अवगत कराने का फैसला किया. उन्होंने लिखा कि ‘Sir, ballia become bagi…’. कहा कि बलिया के लोग बागी हो चुके हैं. अब पूरी फौज उतारकर भी इन्हें संभालना मुश्किल है. डीएम जगदीश्वर निगम की यह चिट्ठी इतिहास के पन्नों में दर्ज है.