UP के इस जिले में कितना है तेल का भंडार? ONGC ने शुरू की नई जगह पर खुदाई, 8 एकड़ जमीन पर घेराबंदी

उत्तर प्रदेश के बलिया में ONGC ने गंगा बेसिन में संभावित विशाल कच्चे तेल के भंडारों की खोज के लिए नई खुदाई शुरू की है. लगभग दो साल के सर्वेक्षण के बाद, ONGC ने 8 एकड़ जमीन लीज पर ली है और विदेशी मशीनों की सहायता से 2500 मीटर की गहराई तक तेल निकालने का लक्ष्य रखा है. यह परियोजना यूपी के साथ-साथ पूरे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

बलिया के बनरही में ओएनजीसी ने शुरू की खुदाई Image Credit:

उत्तर प्रदेश के गंगा बेसिन में कच्चे तेल का बड़ा श्रोत है. ओएनजीसी ने करीब दो साल तक कराए सर्वे के बाद पिछले साल बलिया में तेल का कुआं खोदना शुरू किया था. वहीं अब एक नए स्थान पर ओएनजीसी कुएं की खुदाई कर रही है. इसके लिए 8 एकड़ से अधिक जमीन को लीज पर लेकर ओएनजीसी ने घेराबंदी कर दी है. फिलहाल इस घेराबंदी के अंदर विदेशों से आई मशीनों को इंस्टाल करने का काम चल रहा है.

बता दें कि बलिया से लेकर गाजीपुर और बनारस तक गंगा बेसिन में ओएनजीसी की सर्वे टीम बीते 5 वर्षों से सर्वे कर रही है. इस सर्वे में पाया गया है कि यहां कच्चे तेल और पेट्रोलियम गैस का बहुत बड़ा श्रोत हो सकता है. हालांकि इस सर्वे में अभी तक साफ नहीं हो सका है कि यह तेल कितनी गहराई में है. इसकी जांच के लिए ओएनजीसी ने बलिया, गाजीपुर, बनारस और मिर्जापुर में एक दर्जन से अधिक स्थान चिन्हित किए हैं, जहां खुदाई होनी है.

पहले चित्तू पांडेय के गांव में हुई थी खुदाई

ओएनजीसी ने पिछले साल मार्च महीने में स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय के गांव सागरपाली में करीब 8 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खुदाई शुरू की थी. यह जमीन चित्तू पांडेय के वंशजों की है. इस जमीन पर ओएनजीसी ने करीब 3000 मीटर की गहराई तक कुएं की खुदाई की. इसके बाद अब एनजीसी ने पास के ही एक अन्य गांव बनरही में खुदाई शुरू की है. यह गांव सागर पाली से करीब 5 किमी की दूरी पर गंगा बेसिन में ही है.

बनरही गांव में विदेशी मशीनों से खुदाई

ओएनजीसी ने इस स्थान पर खुदाई के लिए करीब 8 एकड़ जमीन लीज पर लेकर घेराबंदी की है. इस घेरे के अंदर विदेशों से मंगाई गई अत्याधुनिक मशीनों को इंस्टाल किया जा रहा है. इस घेराबंदी के अंदर किसी को जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन अंदर के सूत्रों ने बताया कि खुदाई शुरू हो गई है. माना जा रहा है कि इस स्थान पर कच्चा तेल करीब ढाई हजार मीटर की गहराई में हो सकता है. यहां खुदाई का काम करीब छह महीने तक चलेगा.

कहां बनेगा स्थाई कुआं?

ओएनजीसी के सूत्रों के मुताबिक अभी हो रही खुदाई फाइनल नहीं है. अभी तक जगह जगह खुदाई कर कच्चे तेल की स्थिति और उसे निकालने में आने वाली मुश्किलों का आंकलन किया जा रहा है. सभी चिन्हित स्थानों पर खुदाई के बाद जहां भी तेल की निकासी सबसे बेहतर पायी जाएगी, वहां स्थाई कुआं बनेगा. सूत्रों का दावा है कि गंगा बेसिन में इतना तेल भंडार है कि ना केवल बल्कि पूरे प्रदेश और देश की तकदीर बदल जाएगी.