बांदा में 48.9°C तापमान कैसे पहुंचा? 15 दिन में 6 वैज्ञानिकों की टीम खोजेगी कारण
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में इस साल तापमान 48.9 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया. बढ़ते तापमान और भीषण लू के कारणों का अब वैज्ञानिक अध्ययन होगा. इसके लिए छह वैज्ञानिकों की टीम बनी है, जो रिमोट सेंसिंग और उपग्रह डेटा का उपयोग कर 48.9°C के असली रहस्य का पता लगाएंगे.
बुंदेलखंड के बांदा जिले में गर्मी के बढ़ते प्रकोप और लगातार 48.9 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहे तापमान को लेकर शासन ने गंभीरता दिखाई है. जिलाधिकारी अमित आसेरी के अनुरोध पर शासन स्तर से छह वैज्ञानिकों की टीम जिले में पहुंची है. यह टीम पता लगाएगी कि बांदा में हीट वेव और लू का असर इतना ज्यादा क्यों होता है, असली कारण क्या है?
छह सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम में अनिल कुमार, आलोक सैनी, संतोष कुमार यादव, अर्जुन सिंह, एमएस यादव और अनिरुद्ध उनियाल शामिल हैं. ये वैज्ञानिक आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक, उपग्रह चित्रों और वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर बांदा की गर्मी का राज पता करेंगे. वैज्ञानिकों की टीम को अपना अध्ययन पूरा करने और उसका रिपोर्ट 15 दिन में सौंपना होगा.
बांदा की भीषण गर्मी की होगी हाईटेक जांच
वैज्ञानिकों की टीम जिले के अलग-अलग क्षेत्रों का अध्ययन करेगी. इसमें यह देखा जाएगा कि किन इलाकों में जमीन सबसे ज्यादा गर्म हो रही है, कहां तापमान बढ़ाने वाले कारक मौजूद हैं और किन कारणों से गर्म हवाओं का प्रभाव अधिक महसूस होता है. सर्वे में जमीन की सतह का तापमान के साथ हरियाली, जल स्रोत और भौगोलिक कारण की भी जांच होगी.
- जमीन की सतह का तापमान (Land Surface Temperature): उपग्रहों से मिले डेटा के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि बांदा के कौन से क्षेत्र सबसे ज्यादा गर्म हो रहे हैं.
- हरियाली और वन क्षेत्र की स्थिति: पेड़ों की संख्या, वन क्षेत्र में बदलाव और हरियाली की कमी का तापमान पर कितना असर पड़ रहा है, इसका आकलन किया जाएगा.
- जल स्रोतों की भूमिका: तालाब, नदियां, जलभराव वाले क्षेत्र और भूजल की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा, क्योंकि नमी कम होने से गर्मी का असर बढ़ सकता है.
- भौगोलिक कारण: बुंदेलखंड की चट्टानी भूमि, कम नमी, खुला भूभाग और गर्म हवाओं की दिशा जैसे कारणों को वैज्ञानिक तरीके से जांचा जाएगा.
- शहरी और मानवीय गतिविधियों का असर: सड़कों, कंक्रीट क्षेत्रों, धूल, निर्माण कार्य और अन्य गतिविधियों से बनने वाले “हीट आइलैंड प्रभाव” का भी अध्ययन होगा.
हीट एक्शन प्लान तैयार करने में मिलेगी मदद
वैज्ञानिक यह भी पता लगाएंगे कि बांदा में तापमान केवल मौसम की वजह से बढ़ रहा है या स्थानीय परिस्थितियां भी इसे और ज्यादा गंभीर बना रही हैं. इसके लिए अलग-अलग मौसम के आंकड़े, पुराने तापमान रिकॉर्ड और वर्तमान उपग्रह डेटा को मिलाकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इस अध्ययन की रिपोर्ट आने के बाद जिले में एक्शन प्लान लागू किया जाएगा.
जिला प्रशासन को रिपोर्ट के आधार पर हीट एक्शन प्लान, अधिक पौधरोपण, जल संरक्षण, छायादार क्षेत्रों के विकास और गर्मी से बचाव की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी. माना जा रहा है कि बांदा का यह वैज्ञानिक अध्ययन भविष्य में पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए उपयोगी मॉडल बन सकता है. बढ़ते तापमान को लेकर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है.