बरेली: फर्जी IAS विप्रा शर्मा के गैंग में यूनिवर्सिटी क्लर्क की एंट्री, छात्रों से करवाता था संपर्क, FIR दर्ज

बरेली में IAS अधिकारी बनकर करोड़ों की सरकारी नौकरी ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा और उसकी बहन ने लग्जरी कार पर नीली बत्ती लगाकर बेरोजगारों को फंसाया. अब यूनिवर्सिटी का क्लर्क भी इस गैंग का मददगार निकला है, जो छात्रों को विप्रा तक पहुंचाता था.

अब यूनिवर्सिटी का क्लर्क भी इस गैंग का मददगार निकला Image Credit:

बरेली में फर्जी IAS अधिकारी बनकर सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर बेरोजगारों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले विप्रा शर्मा गैंग की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए नाम सामने आ रहे हैं. गैंग की मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा और उसकी बहन पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, दोनों जेल में बंद हैं. दोनों बहन पर खुद को IAS बताने, लग्जरी कार पर नीली बत्ती लगाकर रौब जमाने और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम ऐंठने के आरोप हैं.

अब इस मामले में नया खुलासा रुहेलखंड विश्वविद्यालय से जुड़ा है. विश्वविद्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात देवप्रकाश का नाम भी ठगी के एक मामले में सामने आया है. बारादरी थाने में उसके खिलाफ दोबारा रिपोर्ट दर्ज हुई है. आरोप है कि देवप्रकाश छात्रों और बेरोजगार युवाओं को विप्रा तक पहुंचाने और नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाने में मदद करता था.

क्लर्क ने कहा- विप्रा से संपर्क है, नौकरी लगवा देंगी

शाहजहांपुर निवासी पुष्पेंद्र ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध पुवायां के एक महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की थी. पढ़ाई के दौरान उनकी पहचान विश्वविद्यालय के क्लर्क देवप्रकाश से हुई. आरोप है कि देवप्रकाश ने बताया कि उसका विप्रा शर्मा से संपर्क है और वह सरकारी नौकरी लगवा सकती हैं. नौकरी न लगने पर रकम वापस कराने का भरोसा भी दिया गया.

इसके बाद देवप्रकाश के साथ पुष्पेंद्र गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित विप्रा के घर पहुंचे. आरोप है कि यहां राजस्व विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे सात लाख रुपये ले लिए गए. काफी समय बाद भी नौकरी नहीं लगी तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ. जांच के दौरान पता चला कि विप्रा के नाम से पहले भी सरकारी नौकरी के नाम पर कई लोगों से रकम लेने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं.

फर्जी नियुक्ति पत्र देकर भेज देते थे नौकरी करने

संजय नगर निवासी अरविंद कुमार ने भी विप्रा के खिलाफ बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है. अरविंद के मुताबिक उनकी विप्रा से पहचान एक कपड़े की दुकान पर हुई थी. आरोप है कि विप्रा ने फोन कर उन्हें गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित घर बुलाया और सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा देकर चार लाख रुपये लिए. इसके बाद उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया.

अरविंद जब नियुक्ति पत्र लेकर शाहजहांपुर पहुंचे तो वहां पहुंचने पर फर्जीवाड़े का पता चला. इसी तरह पुलिस के सामने आए मामलों में आरोप है कि गैंग पहले बेरोजगार युवाओं को अपने प्रभाव में लेता था. खुद को आईएएस अधिकारी बताकर सरकारी विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया जाता था. नौकरी के पद के हिसाब से लाखों रुपये मांगे जाते थे. रकम मिलने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र देकर पीड़ित को संबंधित विभाग में भेज दिया जाता था.

संपत्तियां चिह्नित, 100 से ज्यादा दर्ज है मुकदमें

विप्रा शर्मा के खिलाफ अलग-अलग थानों में लगातार मुकदमे दर्ज होते रहे हैं. पूरे मामले में अब तक 100 से ज्यादा FIR दर्ज किए जा चुके हैं. आरोप है कि क्लर्क देवप्रकाश के खिलाफ पहले भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी, इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. उसे कृषि संकाय में भेजे जाने की बात सामने आई है.

गैंग से जुड़ी संपत्तियों को चिह्नित करने की कार्रवाई भी की गई है. वहीं, SSP अनुराग आर्य ने बताया कि गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है. नए मामलों में सामने आ रहे आरोपियों की भूमिका की जांच हो रही है. किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. ठगी से अर्जित संपत्तियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

Follow Us