फागुन में रामलीला! बिटिश हुकूमत भी नहीं रोक पायी आयोजन, यूनेस्को में दर्ज 166 साल की विरासत
बरेली की 166 साल पुरानी फाल्गुनी रामलीला एक अनूठी परंपरा है, जिसे ब्रिटिश हुकूमत भी नहीं रोक पाई थी. यूनेस्को द्वारा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में दर्ज यह रामलीला शरद ऋतु के बजाय फाल्गुन मास में खेली जाती है. अंग्रेजों के खिलाफ एकजुटता के प्रतीक के रूप में शुरू हुई यह लीला आज भी भव्यता से जारी है, जिसमें राम बारात मुख्य आकर्षण है. यह भारत की पहली 'चलती-फिरती' रामलीला भी है.
उत्तर प्रदेश में बरेली की एक ऐसी परंपरा, जिसे खतम करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी थी. बावजूद इसके यह परंपरा 166 वर्षों से बदस्तूर जारी है. यह परंपरा अनोखी रामलीला की है, जिसे यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की सूची में दर्ज किया है. वैसे देश ही नहीं, दुनिया भर में रामलीला का आयोजन शरद ऋतु में होता है, लेकिन यह एक ऐसी रामलीला है, जिसे फाल्गुन महीने में खेला जाता है.
जी हां, हम बात कर रहे हैं बरेली में बमनपुरी की फाल्गुनी रामलीला की. यह रामलीला आज 166वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. इस रामलीला की शुरुआत वर्ष 1861 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान हुई थी. उस समय अंग्रेजों ने खूब कोशिश की थी कि इस तरह का आयोजन ना हो, लेकिन लोगों की आस्था और एकता की वजह से अंग्रेज भी रोक नहीं पाए. वह भी तब, जब इस रामलीला को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुटता के लिए ही शुरू किया गया था.
गौरवशाली है इतिहास
अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों की वजह से बरेली में सत्ता के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा था. ऐसे में लोगों ने एकजुटता बनाए रखने के लिए 165 साल पहले इस विशेष रामलीला की शुरूआत की. धीरे-धीरे यह आयोजन लोगों की आस्था का केंद्र बन गया. इसमें लोगों की भीड़ बढ़ने लगी तो अंग्रेजी प्रशासन ने इसे रोकने की खूब कोशिश की, लेकिन जनता की मजबूती के आगे अंग्रेजों को मुंह की खानी पड़ी. फाल्गुन मास, यानी होली के मौके पर आयोजित होने वाली इस रामलीला की यही खासियत है कि देश में यह पहली चलती फिरती रामलीला है.
नृसिंह मंदिर में हो रहा आयोजन
यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासतों में स्थान पाकर यह रामलीला अंतरराष्ट्रीय पहचान पा चुकी है. इस साल इस रामलीला का आयोजन 25 फरवरी से हो रहा है. इसमें 16 मार्च यानी 19 दिनों तक भव्य कार्यक्रम होंगे. इस आयोजन का मुख्य केंद्र बड़ी बमनपुरी स्थित नृसिंह मंदिर है. यहीं से श्रीगणेश पूजन और पताका यात्रा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसके बाद नारद मोह, राम जन्म, सीता जन्म, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और धनुष यज्ञ जैसी लीलाओं का मंचन किया जा रहा है.
राम बारात खास आकर्षण
इस रामलीला का सबसे खास दिन राम बारात का होता है. आज 2 मार्च को सुबह से शाम तक प्रभु श्रीराम की भव्य बारात शहर के मुख्य मार्गों से होकर निकली. नृसिंह मंदिर से शुरू होकर यह यात्रा बिहारीपुर ढाल, कुतुबखाना, घंटाघर, नावेल्टी चौराहा, बरेली कॉलेज गेट, कालीबाड़ी, श्यामगंज, साहू गोपीनाथ और शिवाजी मार्ग से गुजरती हुई शाम तक वापस मंदिर पहुंचेगी. रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु फूलों की वर्षा करते हैं और रंगों से स्वागत करते हैं। पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंग जाता है. राम विवाह, राम वनवास, दशरथ मरण, भरत मिलाप और सीता हरण जैसे प्रसंग लोगों को भावुक कर देते हैं. 13 मार्च को रावण वध के साथ अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश दिया जाएगा. फिर 14 मार्च को साहूकारा में होने वाला भरत मिलाप में सबसे मार्मिक दृश्य का मंचन होगा.