इस्तीफा, कलेक्ट्रेट में धरना, पुलिस तैनाती, फिर लखनऊ रवाना, अलंकार अग्निहोत्री मामले में 72 घंटे तक क्या-क्या हुआ?

अलंकार अग्निहोत्री केस में 72 घंटे तक खूब ड्रामा चला. कभी उनके सरकारी आवास पर भीड़ जुटी तो कभी कलेक्ट्रेट में नारेबाजी देखने को मिला. फिलहाल, उन्हें बरेली से लखनऊ भेज दिया गया है. लेकिन उनके समर्थकों का कहना है वे अलंकार अग्निहोत्री के समर्थन में आवाज उठाते रहेंगे.

अलंकार अग्निहोत्री Image Credit:

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफे और फिर सस्पेंशन के बाद बरेली में 72 घंटे तक लगातार हलचल बनी रही. कभी उनके सरकारी आवास पर भीड़ जुटी तो कभी कलेक्ट्रेट में नारेबाजी देखने को मिला. अब 28 जनवरी यानी बुधवार को उन्हें लखनऊ भेज दिया गया. इसके बावजूद यूजीसी के विरोध में और अलंकार अग्निहोत्री के समर्थन में बरेली में उनके समर्थकों का धरना-प्रदर्शन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.

अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा आते ही प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई. दोपहर करीब डेढ़ बजे उनका इस्तीफा पत्र और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद उनके सरकारी आवास पर पत्रकारों, समर्थकों और कुछ सामाजिक संगठनों की भीड़ जुटने लगी. शाम तक कई अधिकारी उनसे मिलने उनके आवास पर पहुंचे. अलंकार लगातार मीडिया से बातचीत करते रहे और अपने पक्ष को सामने रखा.

सपा नेता माता प्रसाद पांडे ने अलंकार अग्निहोत्री से की बात

पीसीएस के कुछ साथी अधिकारी भी अलंकार के आवास पर पहुंचकर उन्हें समझाते नजर आए. फिर 26 जनवरी यानी सोमवार की शाम को ही सपा प्रतिनिधि के जरिए नेता प्रतिपक्ष और सपा नेता माता प्रसाद पांडे ने उनसे बात की. इसके बाद अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी कार्यालय भी पहुंचे.

प्रशासन पर अलंकार अग्निहोत्री ने लगाए गंभीर आरोप

जिलाधिकारी कार्यालय से निकलने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि डीएम आवास पर उन्हें बंधक बना लिया गया था, जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर निकले हैं. फिर वह अपने निजी वाहन से कहीं चले गए. रात भर अपने आवास पर मौजूद नहीं रहें. इसके बाद वह मंगलवार यानी 27 जनवरी की सुबह अपने आवास पर नजर आए.

कलेक्ट्रेट में धरना, पुलिस तैनाती

सुबह करीब 11 बजे अलंकार अपने आवास से पैदल कलेक्ट्रेट के लिए निकले. कलेक्ट्रेट गेट के पास ही धरने पर बैठ गए. थोड़ी देर बाद डीएम चेंबर के सामने नारेबाजी शुरू हो गई. जब पता चला कि डीएम मौजूद नहीं हैं, तो वह दोपहर में वापस आवास लौट गए. शाम को एक बार फिर समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी की.

इन सब घटनाक्रमों के बाग पुलिस प्रशासन ने उनके आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी. समर्थकों को बाहर निकाला गया और घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया. शाम को अलंकार ने व्हाट्सऐप स्टेटस डालकर खुद को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया. वहीं, प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री के दावे को नकार दिया.

72 घंटे की पूरी टाइमलाइन

सोमवार यानी 26 जनवरी (इस्तीफे का दिन)

मंगलवार यानी 27 जनवरी (प्रदर्शन का दिन)

बुधवार यानी 28 जनवरी (लखनऊ रवाना)

लखनऊ भेजे गए अलंकार अग्निहोत्री

तीसरे दिन 28 जनवरी यानी बुधवार को सुबह से ही उनके आवास के बाहर समर्थकों का जुटनी शुरू हो गई. भीड़ बढ़ने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की आवाजाही तेज हो गई. दोपहर बाद प्रशासन ने फैसला लिया कि अलंकार को बरेली से लखनऊ भेजा जाएगा. निजी वाहन से उन्हें लखनऊ रवाना किया गया. उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया. पुलिस की गाड़ी के आगे लेट गए. रोड को जाम कर दिया. समर्थकों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन बिना बताए अलंकार अग्निहोत्री को कहीं ले जा रहा है.

लखनऊ पहुंचने से पहले शाम को अलंकार ने व्हाट्सऐप पर स्टेटस डालकर लिखा कि वह बरेली छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस-प्रशासन नहीं चाहता था कि वह बरेली में रहें. देर रात उनके लखनऊ पहुंचने की जानकारी सामने आई. हालांकि अलंकार के लखनऊ भेजे जाने के बाद भी बरेली में उनके समर्थकों का कहना है कि वह उनके साथ हुए व्यवहार से नाराज हैं और मांग पूरी होने तक आवाज उठाते रहेंगे.