गाजियाबाद जैसी घटना नोएडा में, टीवी देखने से मना करने पर बच्चे ने दी जान; कमरे में लटका मिला शव

गाजियाबाद जैसी घटना अब नोएडा में दोहराई है. मां के डांटने पर एक 12 साल के बच्चे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. बच्चा पांचवी कक्षा का छात्र था, मां के टीवी देखने से मना करने पर उसने यह खौफनाक कदम उठाया. पुलिस को मृतक की बहन ने डायल 112 पर जानकरी दी.

टीवी देखने से रोकने पर बच्चे ने की आत्महत्या Image Credit:

नोएडा में एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है. जहां टीवी देखने से मना करने करने पर एक 12 साल के एक बच्चे ने आत्महत्या कर ली. इस घटना ने पूरी इलाके को झतझोर कर रख दिया है. बताया जा रहा है कि बच्चा टीवी देखने का आदी था और मां की डांट से वह आहत हो गया जिसके बाद उसने यह खौफनाक कदम उठाया.

जिस वक्त उसने आत्महत्या की घर पर कोई मौजूद नहीं था. उसकी बड़ी बहन स्कूल पढ़ने गई थी और मां नोकरी करने एक निजी कम्पनी में गई हुई थी. जब उसकी बड़ी बहन दोपहर के समय स्कूल से वापस लौटी तब उसको जानकारी हुई. उसने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी कि उसके भाई का शव कमरे में पंदे से लटका हुआ है.

घटना वाले दिन भी टीवी देखने पर डांट पड़ी थी

पुलिस के मुताबिक, छात्र की मां ने बताया कि उनका बेटा अमित उर्फ गोलू टीवी देखने का आदि था. कई बार उसको इसी बात पर डांट भी पड़ती थी. उसकी मां चाहती थी कि बेटा पढ़-लिखकर इंजीनियर बने, लेकिन वह टीवी का इतना बड़ा आदि था कि वह ठीक से पढ़ाई भी नहीं कर पता था. घटना वाले दिन भी यही हुआ था, मां ने उसे टीवी देखने के लिए डांटा था.

छात्र की मां ने बताया कि घटना के दिन उसकी बहन सुबह तैयार होकर स्कूल चली गई. मां नौकरी करने के लिए जब निकालने के लिए तैयार हुई तो अमित टीवी देख रहा था. इसी बात पर उसकी मां ने उसे डांट दिया और नौकरी करने के लिए चली गई थी. थाना प्रभारी फेस 2 अवधेश कुमार ने बताया कि घटना तीन दिन पहले की है.

मोबाइल टीवी पर देखकर उठाया इतना बड़ा कदम

थाना प्रभारी फेस 2 अवधेश कुमार ने बताया कि पुलिस को मृतक की बहन ने डायल 112 पर जानकरी दी थी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चों के शव को फंदे से उतार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का ही प्रतीक हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलू पर मामले की जांच कर रही है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है की कम उम्र में इस तरह का खौफनाक कदम उठाना बड़ा सवालहै. क्योंकि बच्चे आजकल मोबाइल और टीवी के इतने आदी हो गए हैं कि उन्हें अच्छे और बुरे का फर्क महसूस नहीं होता. प्रारंभिक जांच में जिस तरह से बच्चे ने गले में फंदा लगा रखा था, उससे पता चलता है कि उसने पहले मोबाइल टीवी पर ऐसी घटना जरूर देखी होगी.