हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नहीं, परिसर में पढ़ी गई थी नमाज; बृजभूषण शरण सिंह की सफाई
भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या की हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने को लेकर दिए अपने बयान पर सफाई दी है. गोंडा में उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई, लेकिन परिसर में नमाज पढ़ी गई थी. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना नहीं था.
अयोध्या की हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने के विवादित बयान को लेकर भाजपा नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सफाई दी है. गोंडा के नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने दोहराया कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई, लेकिन उनका आशय पूरे परिसर से नहीं था, जहां कभी नमाज नहीं अदा किए जाने की बात उन्होंने कही थी.
बृजभूषण शरण सिंह ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का खंडन करना या उन्हें गलत साबित करना नहीं था. उन्होंने खुद को हनुमान जी का भक्त बताते हुए कहा कि यदि उनके बयान से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा मांगते हैं.
क्या बोले बृजभूषण शरण सिंह?
गोंडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह आज भी अपने पहले वाले बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने की बात सही नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं आज भी कह रहा हूं कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई, लेकिन परिसर में नमाज पढ़ी गई थी. अगर मैं उसी समय यह कह देता कि 52 बीघा के पूरे परिसर में नमाज पढ़ी गई थी, तो शायद इतना बड़ा विवाद नहीं होता.’
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया, जिससे यह संदेश गया कि उन्होंने मंदिर के गर्भगृह या सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने की बात कही है, जबकि उनका आशय ऐसा बिल्कुल नहीं था.
मुख्यमंत्री योगी के बयान पर भी दी सफाई
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी मुख्यमंत्री के बयान का विरोध करना नहीं था. उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो कह रहे हैं, वह अपनी जगह सही हैं… मेरा मकसद उनके बयान को गलत साबित करना नहीं था… मेरे बयान को जिस तरह से पेश किया गया, उससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई.’ उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्तर पर इस बयान को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया गया, जबकि उनका आशय बिल्कुल अलग था.
‘मैं हनुमान जी का भक्त हूं’
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने धार्मिक विश्वास का जिक्र करते हुए कहा कि वह स्वयं हनुमान जी के भक्त हैं और उनके लिए हनुमानगढ़ी अत्यंत आस्था का केंद्र है. उन्होंने कहा, ‘मैं हनुमान जी का भक्त हूं… अगर कोई यह कहे कि हनुमान जी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी, तो मैं इसे कभी स्वीकार नहीं करूंगा.’ उन्होंने कहा, ‘अगर मेरे बयान से किसी को तकलीफ पहुंची है या किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं.’
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में एक जनसभा के दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने पवित्र हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का ‘पाप’ किया था… उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करवा सकता है. इसके बाद बीजेपी नेता और सांसद बृजलाल ने भी नमाज पढ़े जाने का दावा किया था.
इस पर बृजभूषण शरण सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि हनुमानगढ़ी में कभी भी नमाज नहीं पढ़ी गई थी और हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था. इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई. कई लोगों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों से जोड़कर देखा, जबकि कई संगठनों ने इस बयान का विरोध किया. अब बृजभूषण शरण सिंह ने सफाई दी है.