चूड़ियों की खनक हो रही खामोश! मिडिल ईस्ट तनाव से संकट में कांच उद्योग; करोड़ों का माल रास्ते में अटका
फिरोजाबाद को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है. इस क्षेत्र का विश्व-प्रसिद्ध कांच उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है. करोड़ों का माल इस समय विदेशों में फंसा हुआ है, जिससे उद्योग और कारीगर दोनों की चिंता बढ़ गई है. कारीगरों की रोज़ी-रोटी पर खतरा है.
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सुहागनगरी फिरोजाबाद के विश्व प्रसिद्ध कांच उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है. मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात और प्रभावित समुद्री मार्गों के कारण कांच और चूड़ियों का निर्यात लगभग ठप हो गया है. अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो हजारों कारीगरों की रोज़ी-रोटी खतरे में आ सकती है.
फिरोजबाद में चूड़ी बनाना एक घरेलू व्यवसाय है. यहां से बने कांच और चूड़ियां लगभग 150 देशों में निर्यात की जाती हैं. वहीं, अब कांच उद्योग की रफ्तार थम सकती है. उद्योगपतियों के मुताबिक, करीब 500 करोड़ रुपये का माल विदेशों में फंसा हुआ है, जिससे उद्योग और कारीगर दोनों की चिंता बढ़ गई है. वह अब सरकार से इस संकट से निपटने की गुहार लगा रहे हैं.
भेजे गए ऑर्डर अब बीच रास्ते में अटक गए
फिरोजाबाद का कांच उद्योग अपनी बारीक कारीगरी और डिज़ाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां के लोग पीढ़ियों से इसपर निर्भर हैं. लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई प्रमुख समुद्री मार्ग प्रभावित हो गए हैं. निर्यातकों का कहना है कि फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों के लिए भेजे गए ऑर्डर अब बीच रास्ते में अटक गए हैं.
जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से माल की समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है, जिससे निर्यातकों का करोड़ों रुपये का भुगतान भी अटका हुआ है. कांच उद्योग पहले से ही उच्च लागत और गैस की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा था. इस समय प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 3 लाख घनमीटर की कटौती हुई है, जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है.
चूड़ियों और कांच की खनक हो रही खामोश
फिरोजाबाद का कांच उद्योग सीधे तौर पर लाखों कारीगरों और मजदूरों के रोजगार से जुड़ा है. निर्यात रुका और उत्पादन लागत बढ़ी तो कई इकाइयों में काम धीमा पड़ गया है. यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो कारीगरों की रोज़ी-रोटी पर भी गंभीर असर पड़ेगा. इसका असर शुरूआत में छोटे और मध्यम इकाइयों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है.
उद्योग से जुड़े व्यापारियों और निर्यातकों का कहना है कि सरकार को इस संकट को गंभीरता से लेते हुए गैस की कीमतों में राहत और निर्यात सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. उनका मानना है कि अगर समाधान जल्द नहीं आया तो सुहागनगरी की चूड़ियों और कांच के सामान की खनक भी दुनिया में खामोश हो सकती है.