लक्ष्य ‘सर तन से जुदा’, मोहरा थे जीशान-गुलफाम; ये मौलाना है सलीम वास्तिक कांड का मास्टर माइंड

गाजियाबाद के यूट्यूबर सलीम वास्तिक बाल बाल बच गए. योजना तो उनके 'सर तन से जुदा' की थी, लेकिन हड़बड़ी में जीशान और गुलफाम ऑपरेशन अधूरा छोड़कर भाग गए थे. गाजियाबाद पुलिस ने इस हमले की साजिश का पर्दाफाश कर दिया है. बताया जा रहा है कि इस वारदात का मास्टर माइंड एक मौलाना है, जो पाकिस्तानी संगठन 'मुस्लिम आर्मी' से जुड़ा है.

सलीम वास्तिक के हमलावर जीशान के बाद गुलफाम भी ढेर

गाजियाबाद के यूट्यूबर व एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक के दोनों हमलावरों के एनकाउंटर के बाद इस पूरी वारदात का खुलासा हो गया है. गाजियाबाद पुलिस की जांच में साफ हो गया है कि इस वारदात की साजिश कैसे और किन लोगों ने रची. इसी के साथ पुलिस वारदात के मास्टर माइंड तक भी पहुंच गई है. यह मास्टर माइंड कोई मौलाना बताया जा रहा है, जो किसी पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाने का काम कर रहा है. पुलिस का दावा है कि इस हमले के पीछे पूरा नेटवर्क काम कर रहा था.

गौरतलब है कि एक हफ्ते गाजियाबाद के लोनी में रहने वाले यूट्यूबर सलीम वास्तिक के ऑफिस में घुसकर दो लोगों ने उनका गला रेत दिया था. पुलिस ने इन दोनों आरोपियों जीशान और उसके बड़े भाई गुलफाम की पहचान की और अलग अलग एनकाउंटर में इन्हें ढेर कर दिया. इस बीच पता चला कि ये दोनों हमलावर तो मोहरा भर थे, वारदात का मास्टर माइंड तो दिल्ली में बैठा कोई मौलाना है. यह मौलाना प्रतिबंधित पाकिस्तानी संगठन ‘मुस्लिम आर्मी मेहंदी मॉडरेटर’ का सदस्य है.

असफल रहा आतंकियों का ऑपरेशन

पुलिस को पुख्ता इनपुट मिले हैं कि जीशान और गुलफाम टेलीग्राम ग्रुप ‘मुस्लिम आर्मी मेहंदी मॉडरेटर’ से जुड़े थे. भारत में इस ग्रुप का एडमिन का मौलाना है. इसी ग्रुप पर जीशान और गुलफाम को सलीम वास्तिक के सर तन से जुदा का टास्क मिला था. मौलाना के निर्देश के मुताबिक जीशान-गुलफाम ने वारदात को अंजाम तो दिया, लेकिन सर तन से जुदा नहीं कर पाए थे. इस वारदात का सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. पुलिस की जांच में जीशान-गुलफाम के दो बैंक खातों की भी जानकाीर मिली है. बताया जा रहा है कि इन्हीं बैंक खातों में वारदात को अंजाम देने के लिए संदिग्ध लेनदेन किया गया था.

बेटे का माथा चूमकर क्या बोला गुलफाम?

वारदात को अंजाम देने के बाद जीशान और गुलफाम पहले खोड़ा कॉलोनी स्थित अपने किराए के कमरे पर आए और कुछ देर रुकने के बाद अमरोहा के कस्बा सैदनंगली स्थित अपने घर पहुंचे थे. वहां गुलफाम ने अपने बेटे का माथा चूमते हुए कहा था कि वह अल्लाह का एक बड़ा काम कर के आ रहा है. उसी समय गुलफाम ने घर वालों को इस घटना की पूरी जानकारी दे दी और फिर दोनों भाई वहां से अलग अलग हो गए थे. अगले दिन जीशान का गाजियाबाद पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया. इसकी जानकारी गुलफाम को अमरोहा के दारौरा गांव में मिली थी.

ऐसे ट्रैस हुआ गुलफाम

वारदात के बाद से ही गुलफाम और जीशान ने अपने फोन बंद कर लिए थे. वहीं जीशान के एनकाउंटर के बाद गुलफाम जमाती बन गया था और राहगीरों के फोन के जरिए अपने घर वालों के संपर्क में था और पुलिस की हरकतों का अपडेट ले रहा था. चूंकि गाजियाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच पहले से इनके पिता बुनियाद अली के फोन पर सर्विलांस पर ले लिया था, इसलिए पुलिस के पास भी गुलफाम के इनपुट आ रहे थे. इस प्रकार पुलिस ने सटीक लोकेशन मिलते ही गुलफाम को भी घेरकर मिट्टी में मिला दिया.

12वीं पास लेकिन बताता था इस्लामिक स्कॉलर

पुलिस के मुताबिक सलीम वास्तिक के दोनों हमलावर मुश्किल से 12वीं तक की पढ़ाई किए. इसके बाद दोनों खोड़ा कॉलोनी में रहकर कारपेंटर का काम करने लगे. इनके बहनोई पहले से यहां रहते हैं और उन्होंने ही इन्हें कमरा भी दिलाया था. पुलिस को मिले इनपुट के मुताबिक दोनों हमलावर मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही कट्टरपंथी हो गए थे. रही सही कसर सोशल मीडिया ने पूरी कर दी. बाद में जीशान खुद को इस्लामिक स्कॉलर बनाकर सोशल मीडिया में तकरीरें करने लगा था. दोनों ब्रॉडकास्ट, इंस्टाग्राम व टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उत्तेजक सामग्री डालते रहते थे.

राजनीति पर भी बड़ा असर

जीशान-गुलफाम के एनकाउंटर से गाजियाबाद की राजनीति भी प्रभावित हुई है. आम तौर पर सीएम योगी के खिलाफ बयान देने वाले बीजेपी के लोनी विधायक इन एनकाउंटर के बाद योगी की नीति की सराहना करते नहीं थक रहे. एनकाउंटर के बाद विधायक गुर्जर ने सीएम योगी से मिलकर उन्हें धन्यवाद दिया और फोटो सोशल मीडिया में शेयर करते हुए लिखा है कि ‘नो कॉम्प्रोमाइज’. माना जा रहा है कि लोनी में हुए इस पूरे घटनाक्रम का संदेश पूरे प्रदेश में गया है.