पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के शिलापट्ट को लेकर गोरखपुर में बवाल, बेटे विनय शंकर पर दर्ज किया गया FIR
गोरखपुर के सोती चौराहे पर साल 1995 पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी की तरफ से पूर्व चेयरमैन विश्वनाथ उमर मार्ग के लोकार्पण का शिलापट्ट लगाया गया था. उसे हटाकर नगर पंचायत की तरफ से नया शिलापट्ट लगाया गया. इसी बात को लेकर हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर और बड़हलगंज चेयरमैन प्रतिनिधि के बीच कॉल पर तीखी नोकझोंक हो गई. अब चेयरमैन प्रतिनिधि ने महेश उमर ने पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी पर एफआईआर दर्ज कराया है.
पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे और पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी पर बड़हलगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. उनपर धमकी देने का आरोप लगा है. दरअसल, पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी और चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर के बीच मोबाइल पर तीखी नोक झोंक हुई है. इसके बाद रविवार यानी 15 की रात में महेश उमर की शिकायत पर पुलिस ने विनय शंकर तिवारी पर मुकदमा दर्ज किया है. यह बहस सोती चौराहे पर शिलापट्ट को लेकर थी.
क्या है मामला?
सोती चौराहे पर साल 1995 पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी की तरफ से पूर्व चेयरमैन विश्वनाथ उमर मार्ग के लोकार्पण का शिलापट्ट लगाया गया था. उसे हटाकर नगर पंचायत की तरफ से नया शिलापट्ट लगाया गया है. इससे मामला बढ़ता गया और अब इस मामले में सियासी रंग ले लिया है, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद नगर पंचायत ने नए शिलापट्ट को हटाकर दूसरे स्थान पर लगा दिया है. बड़हलगंज थानाप्रभारी सुनील कुमार राय ने बताया किमहेश उमर की तहरीर पर पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी के खिलाफ एफाईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने दी सफाई
चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने कहा कि करीब 35 साल पहले तत्कालीन विधायक हरिशंकर तिवारी द्वारा पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ उमर मार्ग का शिलापट्ट लगाया गया था. लेकिन गलती सेउसी पुराने शिलापट्ट पर नए कार्य का शिलापट्ट लगा दिया गया था. उन्हें जैसे ही इसकी जानकारी मिली, नए शिलापट्ट को तुरंत हटाकर दूसरे स्थान पर लगा दिया गया और पुराने शिलापट्ट की साफ-सफाई कर दी गई.
हर मंत्रिमंडल में होता था हरिशंकर तिवारी का नाम
हरिशंकर तिवारी का 16 मई 2023, में निधन हो गया था. उनकी बाहुबली नेता की छवि रही है.उत्तर प्रदेश में सरकार चाहे जिसकी रही हो, लेकिन मंत्रिमंडल में हरिशंकर तिवारी उनका नाम शामिल रहता था. वह पूरे देश में पहली बार चर्चा में तब आए थे जब इंदिरा गांधी के जमाने में साल 1985 के दौरान जेल से निर्दलीय चुनाव जीत कर उन्होंने इतिहास रच दिया था.
