देर आए लेकिन क्या दुरुस्त आए? पार्षदों के मनोनयन से क्या चुनावी समीकरण साध पाएगी BJP
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब केवल एक साल का समय बाकी है. इस बीच पार्टी ने राज्य के विभिन्न नगर निकायों में कुल 2802 कार्यकर्ताओं को मनोनीत पार्षद बनाया है. विधानसभा चुनाव को देखते हुए मनोनयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है. महिलाओं को भी उचित भागीदारी दी गई है.
बीजेपी ने यूपी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के मद्देनजर एक बड़ा फैसला किया है. राज्य के विभिन्न नगर निकायों में कुल 2802 कार्यकर्ताओं को मनोनीत पार्षद बनाया है. यह फैसला लंबे समय से इंतजार कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए ‘बूस्टर डोज’ साबित हुआ है. इससे संगठन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है.
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद की तरफ से जारी अधिसूचना के माध्यम से सोमवार को इन मनोनीत पार्षदों की सूची जारी की गई. इसमें नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के पद शामिल हैं.विशेष रूप से हर जिले में औसतन 10-10 पार्षदों को नामित किया गया है, जबकि कुछ बड़े नगर निगमों जैसे लखनऊ, वाराणसी और आगरा में भी 10-10 नामित सदस्यों की सूची जारी हुई.
समाजिक समीकरण साधने पर दिया जोर
इस कदम से भाजपा ने न केवल निकाय स्तर पर अपनी ताकत बढ़ाई है, बल्कि कार्यकर्ताओं को राजनीतिक मैदान में सक्रिय करने की रणनीति भी अपनाई है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, मनोनयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है. पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर चल रही समाजवादी पार्टी की रणनीति का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने पर जोर दिया. इसमें महिलाओं को भी उचित भागीदारी दी गई है.
2027 के चुनावों में ‘बूस्टर डोज’ का काम करेगा ये फैसला
यह कदम 2023 के नगर निकाय चुनावों के बाद से लंबित मांग को पूरा करने के साथ-साथ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी मनोनीत पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि ‘वे राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ क्षेत्रीय विकास और जनसेवा में योगदान देंगे’. पार्टी ने इस मनोनयन को कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और निराशा दूर करने का माध्यम बनाया है, जो 2027 के चुनावों में ‘बूस्टर डोज’ का काम करेगा.
संगठनात्मक स्तर पर भी बीजेपी ने लिए कई फैसले
बीजेपी ने अपने संगठनात्मक स्तर को लेकर भी कई फैसले लिए. हाल ही में बीजेपी की तरफ 11 जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई , जबकि ब्रज और पश्चिमांचल क्षेत्र के जिलों की टीमें भी 24 घंटे के भीतर घोषित कर दी गईं. पश्चिम क्षेत्र के 15 संगठनात्मक जिलों और ब्रज क्षेत्र के कुछ जिलों में नई टीमों का गठन पूरा हो गया.
प्रदेश स्तर पर समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज
प्रदेश स्तर पर समितियों के गठन की प्रक्रिया भी तेज है, और माना जा रहा है कि इसी महीने के अंत तक नई प्रदेश टीम भी घोषित हो जाएगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति न केवल स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करेगी, बल्कि विधानसभा चुनावों में बूथ मैनेजमेंट और वोट बैंक को साधने में कारगर साबित होगी. लंबे इंतजार के बाद कार्यकर्ताओं में जगा यह उत्साह पार्टी के लिए चुनावी मैदान में मजबूत आधार तैयार कर रहा है.
