लखनऊ में स्मार्ट मीटर विवाद: बिल जमा करने के बाद भी हजारों घरों में अंधेरा, उपभोक्ताओं का हंगामा

लखनऊ में सोमवार यानी 17 मार्च को नेगेटिव बैलेंस वाले 5,855 स्मार्ट मीटर कनेक्शनों की बिजली आपूर्ति अपने आप बंद हो गई. हालांकि, कई उपभोक्ताओं का दावा किया कि कनेक्शन कटते ही तुरंत ऑनलाइन, काउंटर या CSC कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भुगतान कर दिया. पेमेंट सक्सेसफुल होने का मैसेज आने के बावजूद लेसा लखनऊ विद्युत आपूर्ति कंपनी के रिकॉर्ड में उनका बैलेंस अपडेट नहीं हुआ. बिजली आपूर्ति बहाल नहीं किया गया.

लखनऊ स्मार्ट मीटर विवाद

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यूपीपीसीएल द्वारा 13 मार्च से शुरू किए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर बकायेदारों के खिलाफ अभियान का असर लखनऊ में दिखाई दिया. सोमवार यानी 17 मार्च को नेगेटिव बैलेंस वाले 5,855 स्मार्ट मीटर कनेक्शनों की बिजली आपूर्ति अपने आप बंद हो गई. इससे शहर के विभिन्न जोनों में हजारों परिवार अंधेरे में डूब गए. इस अभियान के तहत प्रीपेड मोड में चल रहे मीटरों का बैलेंस शून्य से नीचे पहुंचते ही आपूर्ति ऑटोमैटिक कट जाती है.लखनऊ सेंट्रल 2,099 कनेक्शन, अमौसी 1,430, गोमतीनगर 1,190 और जानकीपुरम 1,166 कनेक्शनों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई.

पेमेंट सक्सेफुल होने के बाद भी बैलेंस अपडेट नहीं हुआ

विभाग के अनुसार, पिछले तीन दिनों में इन जोनों से कुल 8.22 करोड़ रुपये का राजस्व जमा हुआ. लखनऊ सेंट्रल से 3.35 करोड़, गोमतीनगर से 1.75 करोड़, जानकीपुरम से 1.70 करोड़ और अमौसी से 1.42 करोड़ रुपये शामिल हैं. यह समस्या तब और गंभीर हो गई जब कई उपभोक्ताओं ने कनेक्शन कटते ही तुरंत ऑनलाइन, काउंटर या CSC कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भुगतान कर दिया. पेमेंट सक्सेसफुल होने का मैसेज आने के बावजूद लखनऊ विद्युत आपूर्ति कंपनी के रिकॉर्ड में उनका बैलेंस अपडेट नहीं हुआ.

आरएमएस सिस्टम में तकनीकी खराबी और सर्वर अपडेट न होने के कारण देर रात तक बिजली बहाल नहीं हो सकी. इससे गुस्साए उपभोक्ताओं ने जानकीपुरम, लखनऊ सेंट्रल और अमौसी जोन कार्यालयों पर जमकर हंगामा किया. बर्लिंटन चौराहा स्थित पुराने कार्यालय में 500 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई. अधिकारियों के कमरों तक पहुंचना मुश्किल हो गया और कर्मचारियों के साथ तीखी नोकझोंक हुई.गोमतीनगर और जानकीपुरम पुरनिया कार्यालयों में भी उग्र भीड़ ने इंजीनियरों को घेर लिया.स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा, जिसने लोगों को शांत कराया.

उपभोक्ताओं का प्रदर्शन, कई अधिकारी कार्यालय छोड़कर गए

कुछ वरिष्ठ अधिकारी भीड़ देखकर कार्यालय छोड़कर चले गए, जिससे जनाक्रोश और बढ़ गया. लेसा अधिकारियों का कहना है कि सर्वर में तकनीकी समस्या और आरएमएस सिस्टम के अपडेट न होने से पेमेंट रिफ्लेक्ट होने में देरी हुई. कई मामलों में CSC पर जमा राशि पावर कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर रजिस्टर ही नहीं हुई. उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग ने रिमाइंडर दिए बिना सख्ती बरती, जबकि भुगतान के बाद भी असुविधा झेलनी पड़ रही है.

विभाग ने समस्याओं को ठीक करने का दिया आश्वासन

यह घटना स्मार्ट मीटर व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां ऑटो-डिस्कनेक्शन की सुविधा तो बकाया वसूली में मददगार साबित हो रही है, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों से आम जनता को परेशानी हो रही है. विभाग ने आश्वासन दिया है कि ऐसी समस्याओं को जल्द ठीक किया जाएगा, लेकिन उपभोक्ताओं की मांग है कि भुगतान के 10-15 मिनट में ही कनेक्शन बहाल हो.यूपी में करीब 70 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर गो-लाइव हैं, और ऐसे में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए विभाग को सिस्टम मजबूत करने की जरूरत है.

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