झांसी का वो शिव मंदिर, जहां रानी लक्ष्मीबाई करती थीं पूजा… सावन में उमड़ रहा जनसैलाब

झांसी का ऐतिहासिक महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों का प्रमुख आस्था केंद्र है. मध्यकाल में गुसाईं संतों द्वारा निर्मित यह प्राचीन मंदिर रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा है, जो युद्ध पर जाने से पहले आशीर्वाद लेती थीं. यह मंदिर इतिहास, संस्कृति और आस्था का अनुपम संगम है. साथ ही राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है.

सावन में झांसी का सबसे बड़ा शिवधाम Image Credit:

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही झांसी का ऐतिहासिक मढिया महादेव मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां महाजेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं. यह मंदिर केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि झांसी के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

इतिहासकारों के अनुसार, मढिया महादेव मंदिर का निर्माण मध्यकाल में गुसाईं संतों ने कराया था. उस समय गुसाईं संतों का झांसी क्षेत्र में विशेष प्रभाव था. मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें भगवान शिव के उपासक गुसाईं संतों की समाधियों पर स्थापित किया गया था. परिसर का मुख्य आकर्षण महाकालेश्वर मंदिर है, जिसके गर्भगृह में बेसाल्ट पत्थर से बना प्राचीन शिवलिंग स्थापित है.

रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा है मढिया महादेव मंदिर

यह मंदिर राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक भी है. इस मंदिर का संबंध 1857 की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई से भी जुड़ा है. मान्यता है कि रानी लक्ष्मीबाई युद्ध पर जाने से पहले और विशेष अवसरों पर यहां महादेव का आशीर्वाद लेने आती थीं. यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

हालांकि, लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहा इस मंदिर का एक बड़ा हिस्सा अवैध अतिक्रमण की चपेट में था. बाद में योगी सरकार के प्रयासों से मंदिर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और इसके विकास के लिए करीब 46 लाख रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाएं विकसित की गईं.

इतिहास, संस्कृति और आस्था का संगम- पर्यटन अधिकारी

झांसी के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डी.के. शर्मा के अनुसार, सावन के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए हैं. आवागमन के रास्तों को सुगम और चौड़ा किया गया है. अब यहां आकर्षक लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की गई हैं.

उन्होंने कहा कि मंदिर अपनी प्राचीन भव्यता के साथ श्रद्धालुओं का स्वागत कर रहा है. सावन में जब शिवभक्ति अपने चरम पर होती है, तब मढिया महादेव मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं रहता, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और आस्था का ऐसा संगम बन जाता है, जहां हर श्रद्धालु खुद को भगवान शिव और झांसी की विरासत से जुड़ा हुआ महसूस करता है.

रिपोर्ट- विवेक शर्मा, टीवी9, झांसी

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