गैस संकट का फायदा उठा रहे रेस्टोरेंट मालिक, कासगंज में ‘LPG सरचार्ज’ से वसूली
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण देश में रसोई गैस संकट गहराया है. इसी का नाजायज फायदा उठाकर कासगंज के एक रेस्टोरेंट ने ग्राहकों से 'LPG सरचार्ज' वसूलना शुरू कर दिया है. 10 रुपये के इस अतिरिक्त शुल्क का बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. उपभोक्ता इसे ब्लैक मार्केटिंग और अनुचित व्यापार बताकर विरोध कर रहे हैं.
ईरान-इजायरल वार की वजह से देश में बने रसोई गैस संकट का नाजायज फायदा रेस्टोरेंट मालिक भी उठाने लगे हैं. कई जगह रेस्टोरेंट मालिकों ने ग्राहकों से ‘LPG सरचार्ज’ के नाम पर वसूली भी शुरू कर दी है. ऐसा ही एक रेस्टोरेंट का बिल सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. यह बिल उत्तर प्रदेश में कासगंज के एक रेस्टोरेंट “Foodie’s Adda” का है. इसमें 90 रुपये खाने के बिल के साथ 10 रुपये एलपीजी सरचार्ज जोड़ा गया है.
जानकारी के मुताबिक कासगंज के ही रहने वाले एक व्यक्ति अपने मित्र के साथ इस रेस्टोरेंट में गए थे. यहां इन्होंने दो कॉफी का ऑर्डर किया था. यहां कॉफी 45 रुपये की है. काफी पीने के बाद ग्राहक ने बिल मंगाया तो उसमें कॉफी के 90 रुपयों के साथ 10 रुपये एलपीजी सरचार्ज जोड़ कर दिया गया था. ग्राहक ने आपत्ति की तो रेस्टोरेंट मालिक ने कहा कि गैस की किल्लत चल रही है. इसकी वजह से यह सरचार्ज जोड़ा गया है.
सोशल मीडिया में वायरल हो रहा बिल
रेस्टोरेंट से निकलने के बाद कस्टमर ने यह बिल सोशल मीडिया में डाल दिया. अब यह बिल तेजी से वायरल हो रहा है. बड़ी संख्या में यूजर इसे ब्लैक मार्केटिंग बता रहे हैं. इन यूजर्स का कहना है कि एक तरफ देश में संकट की स्थिति है, ऊपर से रेस्टोरेंट वालों ने इसी संकट की आड़ में वसूली भी शुरू कर दी है. वहीं कुछ लोग इसे आपदा में अवसर बता रहे हैं. बता दें कि आमतौर पर रेस्टोरेंट के सभी खर्च जैसे कि गैस, बिजली, स्टाफ आदि का खर्च कस्टमर से वसूल किया जाता है. इसके लिए यह सारे खर्चे खाने की कीमत में ही शामिल कर लिए जाते हैं.
क्या होगा एक्शन?
उपभोक्ता अधिकारों की बात करें तो बिना स्पष्ट जानकारी और सहमति के इस तरह से अतिरिक्त शुल्क वसूलना अनुचित व्यापार की श्रेणी में आता है. इस तरह के कई मामलों में सरकार और उपभोक्ता मंच सख्ती भी दिखा चुके हैं. हालांकि अभी तक प्रशासन ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. टीवी9 भारतवर्ष ने इस संबंध में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी से बात करने की कोशिश की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो सका. उधर, सोशल मीडिया पर लोग इसे उपभोक्ता अधिकार के खिलाफ बता कर आवाज उठा रहे हैं.